रायपुर, छत्तीसगढ़: यूथ हॉस्टल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में 17 से 28 जुलाई 2025 तक लेह से उमलिंग ला (19,024 फीट) तक की एक रोमांचक हाई-एल्टीट्यूड साइकिल यात्रा का आयोजन किया गया। इस यात्रा में रायपुर के साइकिलिस्ट्स सुरेश दुआ और मानव खुराना ने हिस्सा लिया, जिन्होंने लेह के दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर 365 किलोमीटर की साइकिलिंग कर एक मिसाल कायम की।
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यात्रा का विवरण
यात्रा की शुरुआत से पहले 17 से 19 जुलाई तक तीन दिन जलवायु अनुकूलन (Acclimatization) के लिए रखे गए, क्योंकि उमलिंग ला समुद्री तल से 19,024 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जो दुनिया का सबसे ऊंचा मोटरेबल दर्रा है। 20 जुलाई को लेह से यात्रा शुरू हुई। पहले दिन 62 किमी की साइकिलिंग के बाद शारा गांव पहुंचे। दूसरे दिन 80 किमी की यात्रा कर चुमाथांग, तीसरे दिन 45 किमी चलकर न्योमा, चौथे दिन 80 किमी की साइकिलिंग कर हनले, पांचवें दिन 50 किमी चलकर चिसुमले और छठवें दिन 48 किमी की साइकिलिंग के बाद अंतिम पड़ाव उमलिंग ला पहुंचे।
प्रकृति के बीच रोमांच
यात्रा के दौरान साइकिलिस्ट्स ने लेह-लद्दाख के मनोरम पहाड़ी दृश्यों और सिंधु नदी के किनारे साइकिलिंग का लुत्फ उठाया। 7-8 डिग्री सेल्सियस के ठंडे मौसम और ऊंचाई वाले चढ़ावों ने यात्रा को चुनौतीपूर्ण बनाया, लेकिन साइकिलिस्ट्स ने इसे “जन्नत में साइकिलिंग” का अनुभव बताया। खासकर सिंधु नदी के साथ-साथ चलने का एहसास अविस्मरणीय रहा।
साइकिलिस्ट्स की उपलब्धियां
इस यात्रा में शामिल सुरेश दुआ, जो एनआईटी रायपुर में कार्यरत हैं, ने अब तक 75,000 किमी से अधिक साइकिलिंग की है। वहीं, युवा साइकिलिस्ट मानव खुराना, जो एक छात्र हैं, ने 22,000 किमी की साइकिलिंग पूरी की है। दोनों यूथ हॉस्टल, टूर द रायपुर के सक्रिय सदस्य हैं और साइकिलिंग के जरिए साहसिक पर्यटन को बढ़ावा दे रहे हैं।
यूथ हॉस्टल का योगदान
यूथ हॉस्टल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इस साहसिक यात्रा को आयोजित कर युवाओं में साहसिक खेलों और प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया। यह यात्रा न केवल शारीरिक और मानसिक दृढ़ता का प्रतीक है, बल्कि लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और सतत पर्यटन को बढ़ावा देने का भी संदेश देती है।




