रायपुर। छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित DMF घोटाला केस में जेल में बंद कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को गुरुवार शाम रिहा कर दिया गया। करीब तीन साल बाद जेल से बाहर आते समय उन्होंने मुख्य गेट पर सिर झुकाकर ऐसा भाव प्रकट किया, मानो किसी के पैर छू रहे हों। इस दौरान उनके चेहरे पर मुस्कान नजर आई।
सफेद शर्ट-पैंट और जैकेट पहने, हाथ में बैग लिए तिवारी जैसे ही जेल से बाहर निकले, उनके दोस्त और रिश्तेदार पहले से मौजूद थे। बाहर आते ही उन्होंने सभी से मुलाकात की और फिर कार में बैठकर घर के लिए रवाना हो गए।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से तिवारी को जमानत मिली थी। उनकी पैरवी सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी, शशांक मिश्रा और तुषार गिरि ने की। कोर्ट ने जमानत के साथ यह शर्त लगाई कि तिवारी छत्तीसगढ़ में तभी रहेंगे, जब जांच एजेंसियों या निचली अदालतों को उनकी जरूरत होगी।
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सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉय माल्या बागची ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट एक साथ दो मामलों की सुनवाई कर रहा था, पहला DMF घोटाले में अंतरिम जमानत की याचिका और दूसरा कोयला लेवी घोटाले में छत्तीसगढ़ सरकार की जमानत रद्द करने की याचिका।
आदेश में कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को अंतरिम जमानत पर रिहा किया जा सकता है। निष्पक्षता बनाए रखने के लिए दोनों पक्षों की दलीलों का उल्लेख अंतिम सुनवाई तक टाला गया है। तिवारी ने 29 अक्टूबर 2022 को जस्टिस अजय सिंह राजपूत की अदालत में सरेंडर किया था।




