वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 5 नवंबर को काशी पहुंचकर देव दीपावली के भव्य उत्सव में शामिल होंगे। उन्होंने लखनऊ में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक आत्मा और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बने। कार्तिक पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला यह पर्व काशी की सनातन परंपरा और गंगा आराधना का अद्वितीय संगम माना जाता है।
अधिकारियों को ‘क्लीन काशी, ग्रीन काशी, डिवाइन काशी’ की भावना को साकार करने के लिए तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि देव दीपावली भारत की उस अनादि परंपरा का प्रतीक है, जहां दीप केवल ज्योति नहीं, बल्कि धर्म, कर्तव्य और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक होते हैं। उन्होंने गंगा महोत्सव (1 से 4 नवंबर) और देव दीपावली (5 नवंबर) की सभी तैयारियों को समयबद्ध, सुव्यवस्थित और उच्च गुणवत्ता का रखने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री का विजन है कि इस उत्सव में श्रद्धा, अनुशासन और सौंदर्य का संतुलन स्पष्ट रूप से दिखाई दे, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक ‘अतिथि देवो भव’ की भावना का अनुभव कर सकें।
सुरक्षा, स्वच्छता और भीड़ नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए पुलिस, नगर निगम और स्वास्थ्यकर्मियों की पर्याप्त तैनाती की जाए। घाटों पर स्मार्ट लाइटिंग, थीम आधारित इंस्टॉलेशन और ड्रोन व सीसीटीवी से निगरानी की व्यवस्था की जाएगी। नाविकों को सुरक्षा उपकरण, लाइफ जैकेट और निर्धारित मार्गों की जानकारी दी जाएगी।
देव दीपावली पर काशी के 84 घाटों को सजाया जाएगा, जहां 10 लाख से अधिक मिट्टी के दीये जलाने की तैयारी है। इस अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। चेत सिंह घाट पर ‘काशी कथा’ नामक 3D प्रोजेक्शन मैपिंग और लेजर शो का आयोजन किया जाएगा, जो काशी की दिव्यता, इतिहास और आस्था का दृश्य प्रस्तुत करेगा। मुख्य आकर्षण काशी विश्वनाथ धाम के सामने गंगा तट पर होने वाली आतिशबाजी होगी। नमो घाट, राजघाट, राजेन्द्र प्रसाद घाट और दशाश्वमेध घाट सहित अन्य घाटों पर दीपोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।




