नेशनल डेस्क। पाकिस्तान के रावलपिंडी की अदियाला जेल के बाहर अफरा-तफरी है। सोशल मीडिया पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की हत्या की खबरों से भरा पड़ा है। लेकिन असली सवाल यही है। क्या हुआ है, और क्यों कोई साफ जवाब नहीं दे रहा?
अफगान मीडिया की एक रिपोर्ट कहती है कि इमरान खान “मार दिए गए।” दावा बड़ा है, लेकिन पाकिस्तान सरकार का जवाब – सिर्फ “अफवाह।”
अगर सब ठीक है तो सरकार पारदर्शी क्यों नहीं?
बताया जा रहा है कि इमरान खान की तीनों बहनों को जेल में एंट्री नहीं मिली।
अगर कैदी स्वस्थ है, सुरक्षित है, तो अपने ही परिवार से मिलने में क्या दिक्कत? जेल के गेट पर पुलिस की अतिरिक्त तैनाती, बैरिकेडिंग, और भीड़ को रोकने की कोशिशें।
क्या यह सिर्फ “अफवाहों” का असर है या जेल के अंदर कुछ ऐसा है जो दुनिया से छिपाया जा रहा?
ऐसे मामलों में दो लाइन का खंडन काफी नहीं होता।
क्यों नहीं कोई वीडियो, मेडिकल अपडेट या आधिकारिक बयान जारी किया जा रहा? इमरान खान के समर्थक देशभर में भड़क सकते हैं।
क्या इसी डर में खबर को दबाया जा रहा है?
सवाल एक नहीं, कई हैं।
और जवाब अब तक एक भी साफ नहीं। जब एक पूर्व प्रधानमंत्री जेल में हों, मुलाक़ात बंद हो, रिपोर्टें विरोधाभासी हों और सरकार की चुप्पी गहरी हो, तब अफवाहों का घूमना स्वाभाविक है। असली बात क्या है, यह तब तक नहीं पता चलेगा जब तक पाकिस्तान सरकार खुलकर स्थिति सामने नहीं रखती।



