नई दिल्ली। ईरान और इजरायल के बीच हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और जंग जैसे हालात बन चुके हैं। ईरान ने शनिवार को एक बार फिर इजरायल पर मिसाइल हमले किए हैं और इसे “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस III” का हिस्सा बताया है। ईरानी मिलिट्री के मुताबिक, इस ऑपरेशन का मकसद ज़ायोनी शासन (इजरायल) की नरसंहार और आतंक फैलाने की क्षमता को पूरी तरह खत्म करना है।
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ईरानी सरकारी न्यूज एजेंसी IRINN के अनुसार, तबरीज़ और इस्फ़हान शहरों में एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया है, क्योंकि इन इलाकों को इजरायली हमलों का खतरा है। ईरान ने दावा किया है कि इजरायली हमले के कारण दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस क्षेत्र में उत्पादन आंशिक रूप से बंद करना पड़ा है।
इसी बीच, इराक ने अमेरिका से अपील की है कि वह इजरायल को अपने एयरस्पेस का इस्तेमाल करके ईरान पर हमले करने से रोके। इराक ने चेतावनी दी है कि इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने भी इस संकट में अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया है।
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दूसरी ओर, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो संदेश में कहा कि इजरायल अब ईरानी शासन के हर ठिकाने और हर लक्ष्य को निशाना बनाएगा। उन्होंने कहा, “आप तेहरान के आसमान में इजरायली वायुसेना के लड़ाकू विमान देखेंगे।”
इजरायल ने “ऑपरेशन राइजिंग लॉयन” के तहत ईरान के नतांज, इस्फ़हान और तेहरान जैसे शहरों में स्थित परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। इस टकराव ने न सिर्फ पश्चिम एशिया बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है।
अब दुनिया की निगाहें इस बढ़ते युद्ध के असर और इसके संभावित वैश्विक परिणामों पर टिकी हैं।




