नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र सोमवार, 21 जुलाई से शुरू होने जा रहा है और यह सत्र 21 अगस्त तक चलेगा। करीब एक महीने तक चलने वाले इस सत्र में कई गंभीर और संवेदनशील मुद्दों पर बहस और हंगामे के आसार हैं। बजट सत्र के बाद से अब तक के 108 दिनों में देश और विदेश में कई अहम घटनाएं घटी हैं, जिनका सीधा राजनीतिक असर इस सत्र में देखने को मिलेगा।
वरिष्ठ पत्रकार और ‘हाऊ प्राइम मिनिस्टर्स डिसाइड’ पुस्तक की लेखिका नीरजा चौधरी के मुताबिक, मानसून सत्र बेहद गरमाने वाला हो सकता है। विपक्ष सरकार को पहलगाम आतंकी हमले, ऑपरेशन सिंदूर, भारत-रूस संबंधों में आई तल्खी, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के सीजफायर दावों और एयर इंडिया विमान हादसे जैसे मुद्दों पर घेरेगा।
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इसके साथ ही बिहार चुनाव को लेकर भी विपक्ष सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपना सकता है, क्योंकि यह सत्र चुनाव से पहले का आखिरी सत्र होगा।
1. पहलगाम आतंकी हमला और जांच पर उठेंगे सवाल
22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 भारतीय नागरिकों की मौत हुई थी। हमले को तीन महीने से ज्यादा वक्त बीत चुका है, लेकिन अब तक किसी भी आतंकी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। ऐसे में विपक्ष सरकार से हमले की जांच की धीमी गति और खुफिया तंत्र की विफलता पर जवाब मांग सकता है।
2. ऑपरेशन सिंदूर और विदेश नीति पर बहस की तैयारी
हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में चल रहे आतंकी कैंपों पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। इस ऑपरेशन की सफलता, पारदर्शिता और रणनीतिक असर को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने करगिल युद्ध की तर्ज पर संसद में इस पर विस्तृत चर्चा की मांग की है।
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3. एयर इंडिया विमान हादसे में पारदर्शिता की मांग
12 जून को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे में 260 लोगों की जान गई थी। शुरुआती जांच रिपोर्ट पर भी कई सवाल खड़े हो चुके हैं। विपक्ष इस मामले में जवाबदेही तय करने, पारदर्शी जांच और पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की मांग को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा करेगा।
4. बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन पर सियासी टकराव
बिहार में साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव आयोग राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन अभियान चला रहा है, जिसे लेकर विपक्ष चुनावी धांधली और पारदर्शिता की कमी के आरोप लगा रहा है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत पूरा INDIA गठबंधन इस मुद्दे पर भाजपा को घेरने की तैयारी में है।
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5. मणिपुर हिंसा और राष्ट्रपति शासन पर चर्चा संभव
मणिपुर में मई 2023 से जारी हिंसा अभी भी थमी नहीं है। राज्य कुकी और मैतेई समुदायों के बीच बंटा हुआ है। विपक्ष मणिपुर में शांति बहाली में केंद्र की विफलता और राष्ट्रपति शासन की निरंतरता पर सवाल उठा सकता है। वहीं, भाजपा राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव ला सकती है।
6. विदेश नीति और चीन सीमा विवाद भी एजेंडे में
कांग्रेस और विपक्षी दल भारत की विदेश नीति खासकर चीन को लेकर सरकार की रणनीति पर सवाल उठाते रहे हैं। हालिया सीमा विवाद और चीनी दावों को लेकर विपक्ष संसद में चर्चा की मांग कर सकता है। साथ ही, ऑपरेशन सिंदूर के अंतरराष्ट्रीय प्रभावों को लेकर सरकार की विदेश नीति की आलोचना हो सकती है।




