National Herald case: रायपुर। नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किए जाने पर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने रायपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता में इसे “प्रतिशोध की राजनीति” करार दिया और कहा कि सरकार विपक्ष की छवि धूमिल करने की कोशिश कर रही है।
सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला कांग्रेस को डराने और बिहार चुनाव से पहले मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए उठाया गया है। उन्होंने कहा, “यह केस सिर्फ इसलिए किया गया है ताकि कांग्रेस बुलंदी से न लड़े। मोदी सरकार विपक्ष से डरती है, इसलिए ईडी का इस्तेमाल हथियार की तरह किया जा रहा है।”
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National Herald case: श्रीनेत ने बताया कि नेशनल हेराल्ड अखबार की शुरुआत महात्मा गांधी, सरदार पटेल जैसे नेताओं की प्रेरणा से हुई थी और ब्रिटिश हुकूमत को यह अखबार उतना ही खलता था, जितना आज की सरकार को खलता है। उन्होंने कहा कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की आर्थिक स्थिति खराब होने के बाद कांग्रेस ने करीब 90 करोड़ रुपये का लोन दिया, जिससे कर्मचारियों की सैलरी और पीएफ जैसे जरूरी भुगतान किए गए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लोन बैंक ट्रांजेक्शन और चेक के माध्यम से पारदर्शिता के साथ दिया गया था। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “कांग्रेस पैसा कैसे दे सकती है, ये सवाल उठाया जाता है, जबकि चुनाव आयोग 2012 में ही स्पष्ट कर चुका है कि कांग्रेस ऐसा कर सकती है।” कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यंग इंडिया एक नॉन-प्रॉफिट संस्था है और इसका कोई कमर्शियल उद्देश्य नहीं है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी, ऑस्कर फर्नांडिस और मोतीलाल वोरा इसके शेयर होल्डर रहे हैं, लेकिन यंग इंडिया ने AJL की संपत्तियों पर कोई कब्जा नहीं किया है।
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National Herald case: बीजेपी द्वारा 5,000 करोड़ की संपत्ति होने के दावे को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, “सरकार की ही इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इसे सिर्फ 369 करोड़ बताया है।” उन्होंने यह भी कहा कि 2015 में ईडी ने खुद इस केस को मनी लॉन्ड्रिंग का मामला मानने से इनकार किया था, लेकिन फिर भी मोदी सरकार ने इसे आगे बढ़ाया। सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि चार्जशीट सिर्फ कोर्ट की समयसीमा से पहले दाखिल की गई है, ताकि मामला रद्द न हो।
प्रवक्ता ने राज्य के उपमुख्यमंत्री अरुण साव पर भी निशाना साधते हुए कहा, “अगर डिप्टी सीएम पढ़े-लिखे होते और आर्थिक मामलों की जानकारी रखते, तो कांग्रेस को बैंक कहने जैसा बयान न देते। चुनाव आयोग ने साफ किया है कि राजनीतिक पार्टियां जरूरत पड़ने पर फंडिंग कर सकती हैं।”




