रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 14 जुलाई से 18 जुलाई तक चलेगा। महज पांच दिनों के इस सत्र को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सत्ता और विपक्ष दोनों ही खेमे सत्र को लेकर अपनी-अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। सदन के भीतर तीखी बहस और सवाल-जवाब की संभावनाएं प्रबल हैं, क्योंकि सरकार को बने डेढ़ साल बीत चुके हैं और कई मुद्दों पर विपक्ष हमलावर रुख अपना सकता है।
कांग्रेस की आज अहम बैठक
रायपुर स्थित राजीव भवन में आज शाम 4 बजे कांग्रेस विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। बैठक की अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत करेंगे। इस मौके पर पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी मौजूद रहेंगे। इस बैठक में विधानसभा सत्र के दौरान सरकार को घेरने की व्यापक रणनीति पर चर्चा होगी।
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मिली जानकारी के अनुसार, कांग्रेस बिजली दरों में बढ़ोतरी, डीएपी खाद की किल्लत, शराब घोटाला, कानून व्यवस्था, अवैध रेत और शराब कारोबार, राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी जैसे कई ज्वलंत मुद्दों को लेकर सरकार पर हमला बोलने की तैयारी में है। संगठन की ओर से विधायकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सदन में पूरी सक्रियता के साथ सरकार की विफलताओं को उजागर करें।
विपक्ष लाएगा स्थगन प्रस्ताव, सदन में उठेंगे तीखे सवाल
कांग्रेस विपक्ष के तौर पर इस बार स्थगन प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि सत्र के दौरान कुल पांच बैठकें होंगी और अब तक विधायकों की ओर से 996 सवाल लगाए जा चुके हैं। ऐसे में कृषि, शिक्षा, खाद्य सुरक्षा, पेड़ों की अवैध कटाई, और भारत माला परियोजना में कथित भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा होना तय माना जा रहा है।
इसके अलावा आबकारी विभाग से जुड़े घोटालों और अधिकारियों के निलंबन जैसे मामलों पर भी विपक्ष सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश करेगा।
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भाजपा भी सतर्क, सीएम निवास में आज रात बैठक
वहीं सत्ता पक्ष भाजपा भी पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। कांग्रेस के संभावित हमलों से निपटने और प्रभावी जवाब देने के लिए भाजपा विधायक दल की बैठक आज शाम 7 बजे मुख्यमंत्री के नवा रायपुर स्थित निवास में होगी। बैठक में मुख्यमंत्री सहित सभी भाजपा विधायक शामिल होंगे। इस दौरान सदन में सरकार की नीतियों और उपलब्धियों को मजबूती से रखने की रणनीति तय की जाएगी।
सत्ता पक्ष में भी दिख सकता है असंतोष
दिलचस्प बात यह है कि इस बार सदन में सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के कुछ विधायक भी तीखे तेवर अपना सकते हैं। सरकार को बने करीब 18 महीने हो चुके हैं और कई क्षेत्रों में अपेक्षित प्रगति नहीं दिख रही है। ऐसे में खाद-बीज की कमी, युक्तियुक्तकरण के नाम पर कर्मचारियों की परेशानी, बिजली दरों में इजाफा जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष के भीतर से भी असंतोष की आवाजें उठ सकती हैं।




