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    Home » मणिपुर में राष्ट्रपति शासन छह महीने के लिए बढ़ा, लोकसभा ने प्रस्ताव को दी मंजूरी

    मणिपुर में राष्ट्रपति शासन छह महीने के लिए बढ़ा, लोकसभा ने प्रस्ताव को दी मंजूरी

    Shrikant BaghmareBy Shrikant BaghmareJuly 25, 2025 trending No Comments3 Mins Read
    मणिपुर में राष्ट्रपति शासन छह महीने के लिए बढ़ा

    President Rule in Manipur: पिछले दो वर्षों से जातीय हिंसा की आग में जल रहे मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की अवधि को छह महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को राज्यसभा में इस संबंध में एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे सदन ने पारित कर दिया। यह विस्तार 13 अगस्त 2025 से प्रभावी होगा। केंद्र सरकार ने यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत लिया है।

    गौरतलब है कि मणिपुर में 13 फरवरी 2025 को पहली बार राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। यह कदम राज्य में जारी गंभीर जातीय हिंसा और प्रशासनिक विफलता के चलते उठाया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने 9 फरवरी को इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद राज्य में वैकल्पिक सरकार गठन का कोई दावा नहीं किया गया। ऐसे में केंद्र ने विधानसभा को भंग कर राष्ट्रपति शासन लागू करने का निर्णय लिया।

    मणिपुर में हिंसा की शुरुआत मई 2023 में हुई थी, जब हाई कोर्ट के एक फैसले के विरोध में ‘जनजातीय एकजुटता मार्च’ निकाला गया। इसके बाद कुकी और मैतेई समुदायों के बीच गहरा जातीय संघर्ष छिड़ गया, जो देखते ही देखते भीषण हिंसा में बदल गया। अब तक इस संघर्ष में 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों परिवारों को पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा है।

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    राज्य सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद हालात सामान्य नहीं हो पाए। लगातार बिगड़ते हालात के बीच कानून-व्यवस्था की स्थिति पर नियंत्रण न पाने और राजनीतिक नेतृत्व की अनुपस्थिति के कारण अंततः राष्ट्रपति शासन लागू किया गया।

    संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन
    अनुच्छेद 356 के तहत यदि किसी राज्य में संवैधानिक मशीनरी विफल हो जाती है, तो केंद्र सरकार राष्ट्रपति शासन लागू कर सकती है। यह शासन प्रारंभिक रूप से 6 महीने के लिए लागू होता है, और संसद की मंजूरी के साथ हर छह महीने में अधिकतम 3 साल तक बढ़ाया जा सकता है।

    मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की पहली अवधि 13 अगस्त 2025 को समाप्त हो रही थी, इसलिए इसे बढ़ाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाया गया जिसे मंजूरी मिल गई।

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    लोकतांत्रिक सरकार की बहाली की मांग तेज
    हाल के महीनों में राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में हलचल देखी गई है। एनडीए के विधायक, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के समर्थक और विरोधी दोनों शामिल हैं, राज्य में एक बार फिर से लोकतांत्रिक सरकार की बहाली की मांग कर रहे हैं। इन विधायकों का कहना है कि राष्ट्रपति शासन से स्थायी समाधान नहीं निकला है, और अब राज्य को एक स्थिर राजनीतिक नेतृत्व की आवश्यकता है।

    गृह मंत्री अमित शाह ने पिछली बार संसद में स्पष्ट किया था कि बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद किसी भी विधायक ने सरकार बनाने का दावा नहीं किया, इसी कारण केंद्र को राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा। हालांकि अब, सरकार के समर्थन में पर्याप्त संख्या होने का दावा किया जा रहा है, जिससे जल्द ही मणिपुर में राजनीतिक गतिविधियों के फिर से तेज होने की संभावना है।

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