नई दिल्ली। लाल किला कार ब्लास्ट में इस्तेमाल विस्फोटक मिलिट्री ग्रेड का था। जांच अधिकारियों के अनुसार अमोनियम नाइट्रेट जैसे साधारण विस्फोटक से इतनी तीव्रता संभव नहीं थी। फरीदाबाद ठिकाने से बरामद सामग्री भी इसकी पुष्टि नहीं करती।
आतंकी उमर और मुजम्मिल के तुर्किये पहुंचने तथा जैश-ए-मोहम्मद हैंडलर्स से संपर्क के सबूत मिले हैं। मूल योजना 26/11 स्टाइल में दिल्ली के कई स्थानों पर एक साथ हमले की थी। 26 जनवरी और दीपावली के दौरान लाल किला तथा प्रमुख बाजारों में सीरियल ब्लास्ट की तैयारी थी लेकिन समयाभाव में टारगेट रद्द किए गए।
वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मिलिट्री ग्रेड विस्फोटक की पुष्टि हुई तो पाकिस्तानी सेना की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। इससे भारत की प्रतिक्रिया का स्वरूप भी बदल सकता है।
क्षतिग्रस्त हुंडई i20 के सभी पार्ट्स मंगलवार रात रोहिणी फॉरेंसिक साइंस लैब भेजे गए। एफएसएल, सीबीआई और एनआईए की संयुक्त टीम 200 से अधिक नमूनों की जांच कर रही है। अग्निशमन के दौरान पानी के इस्तेमाल से केमिकल क्षतिग्रस्त हुए जिससे निष्कर्ष में देरी हुई।
जांच में पता चला कि पुलवामा में जैश समर्थन पोस्टर लगने के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस की कार्रवाई से घबराए आतंकियों ने हताशा में डॉ. उमर नबी ने सोमवार शाम लाल किला के बाहर आत्मघाती हमला किया। जैश हैंडलर्स पाकिस्तान से लगातार निर्देश दे रहे थे। पाकिस्तानी कनेक्शन की गहन जांच जारी है।




