बिलासपुर। गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी (जीजीसीयू) एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार मामला प्रशासनिक नहीं, बल्कि अकादमिक मर्यादा से जुड़ा है। राष्ट्रीय परिसंवाद के दौरान आमंत्रित वरिष्ठ कथाकार के साथ कुलपति द्वारा किए गए व्यवहार ने विश्वविद्यालय की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
साहित्य अकादमी, नई दिल्ली और जीजीसीयू के हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल कर रहे थे। परिसंवाद में देश के विभिन्न हिस्सों से साहित्यकार और शिक्षाविद आमंत्रित थे।
कार्यक्रम के दौरान कुलपति के संबोधन के समय नागपुर से आए वरिष्ठ कथाकार मनोज रूपड़ा सामने की सोफे पर बैठे थे। इसी बीच कुलपति ने मंच से उनसे सवाल कर दिया—
“भाई साहब, आप बोर तो नहीं हो रहे हैं?”
इस पर कथाकार मनोज रूपड़ा ने संयत लेकिन स्पष्ट जवाब दिया—
“विषय पर बात करिए।”
यहीं से माहौल बदल गया। यह जवाब कुलपति को नागवार गुजरा। मंच से ही प्रो. आलोक चक्रवाल ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा,
“मैं बिना मुद्दे की बात नहीं करता, लेकिन कुलपति से कैसे बात करते हैं, इसका विवेक आपको नहीं है।”
मामला यहीं नहीं रुका। कुलपति ने सार्वजनिक रूप से यह भी कह दिया कि
“आपको बुलाया किसने है,”
और कथाकार को खरी-खोटी सुनाते हुए कार्यक्रम से चले जाने का निर्देश दे दिया। साथ ही यह भी कहा गया कि भविष्य में उन्हें दोबारा आमंत्रित न किया जाए।
इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। अकादमिक और साहित्यिक जगत में इस व्यवहार को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अपमानजनक बताया जा रहा है। शिक्षाविदों का कहना है कि राष्ट्रीय परिसंवाद जैसे मंच पर इस तरह का आचरण न सिर्फ व्यक्तिगत गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि विश्वविद्यालय की अकादमिक संस्कृति पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन घटना ने जीजीसीयू को एक बार फिर विवादों के केंद्र में ला खड़ा किया है।




