नेशनल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ऑनलाइन गेमिंग कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से सभी याचिकाओं पर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से दाखिल जवाब की प्रति याचिकाकर्ताओं के वकीलों को समय से उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे भी अपनी प्रतिक्रिया तैयार कर सकें।
यह मामला जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और के.वी. विश्वनाथन की बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए आया था। अदालत ने इस दौरान यह भी कहा कि केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) जवाब की प्रति सभी पक्षों को अग्रिम रूप से मुहैया कराएं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक शतरंज खिलाड़ी द्वारा दायर याचिका पर भी गौर किया, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि ई-स्पोर्ट्स की आड़ में कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जुआ और सट्टेबाजी को बढ़ावा दे रहे हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि ऐसे सभी प्लेटफॉर्म के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और कानून के दायरे में लाया जाए।
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याचिकाकर्ताओं की मांग है कि देश में ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए से जुड़े सभी प्लेटफॉर्म को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए, क्योंकि ये युवाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से नुकसान पहुंचा रहे हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में पारित ‘प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025’ के तहत भारत में रियल मनी गेमिंग (वास्तविक धन पर आधारित गेम्स) पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह विधेयक 20 अगस्त को लोकसभा और 21 अगस्त को राज्यसभा से पारित हुआ था। 22 अगस्त को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अब यह कानून बन चुका है।




