नई दिल्ली। वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) को लेकर देशभर में सियासी घमासान जारी है। मंगलवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की दो सदस्यीय बेंच SIR की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि 1950 के बाद जन्मा हर व्यक्ति भारत का नागरिक है, लेकिन मतदाता सूची में गंभीर गड़बड़ियां की गई हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एक छोटे विधानसभा क्षेत्र में 12 जीवित लोगों को मृत घोषित कर दिया गया और BLO ने कोई कार्यवाही नहीं की। वहीं, सीनियर एडवोकेट गोपाल एस. ने दावा किया कि 65 लाख नाम हटाना सामूहिक बहिष्करण है।
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चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि यह केवल ड्राफ्ट रोल है और इतने बड़े अभ्यास में कुछ त्रुटियां संभव हैं, लेकिन यह कहना कि मृतकों को जीवित या जीवित को मृत दिखाया गया, सही नहीं है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह तथ्यों और आंकड़ों के साथ तैयार रहे, क्योंकि मतदाताओं की संख्या, मृतकों की सूची और अन्य विवरणों पर सवाल उठ सकते हैं।
गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर रोक लगाने से इनकार किया था, लेकिन चेतावनी दी थी कि अगर बड़ी संख्या में नाम हटाए गए तो कोर्ट हस्तक्षेप करेगा। विवाद का केंद्र 65 लाख नामों का हटाया जाना है, जिसमें 22 लाख मृतक, 36 लाख स्थायी रूप से स्थानांतरित और करीब 7 लाख डुप्लीकेट मतदाता बताए गए हैं।
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग बीजेपी के पक्ष में काम कर रहा है, जबकि बीजेपी का कहना है कि विपक्ष हार के डर से मनगढ़ंत आरोप लगा रहा है। इस मुद्दे पर विपक्षी दल लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।




