रायपुर। राजधानी रायपुर के कोटा क्षेत्र स्थित सुयश हॉस्पिटल को उपभोक्ता फोरम ने एक मरीज की मृत्यु के मामले में चिकित्सकीय लापरवाही का दोषी ठहराया है। फोरम ने अस्पताल को 15 लाख रुपए मुआवजा (6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित), 1 लाख रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति और 10 हजार रुपए वाद व्यय अदा करने का आदेश दिया है।
यह मामला वर्ष 2010 का है, जब हिमांशु सोनी नामक मरीज की इलाज के दौरान इंजेक्शन लगाए जाने के बाद मृत्यु हो गई थी। मृतक की पत्नी हिना सोनी ने इस घटना को लेकर उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई थी। पूरे 13 वर्षों तक चले इस प्रकरण में अब जाकर उन्हें न्याय मिला है।
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जानिए पूरा मामला
हिमांशु सोनी वर्ष 2008 में सड़क दुर्घटना का शिकार हुए थे, जिसके बाद से उन्हें पैरों में कमजोरी और मूत्र नली से संबंधित समस्याएं थीं। 18 से 24 दिसंबर 2010 के बीच वे रायपुर के सुयश हॉस्पिटल में भर्ती रहे, जहां उनकी लेजर सर्जरी की गई। इलाज के बाद अस्पताल ने उन्हें ठीक बताकर छुट्टी दे दी।
हालांकि, 26 दिसंबर को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और परिजन उन्हें फिर अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि इंजेक्शन दिए जाने के बाद उनकी स्थिति और खराब हो गई और वहीं उनकी मृत्यु हो गई।
अस्पताल ने मना किया, लेकिन सामने आए तथ्य
अस्पताल प्रबंधन ने दावा किया कि मरीज को मृत अवस्था में लाया गया था और कोई इंजेक्शन नहीं दिया गया। लेकिन जिला उपभोक्ता आयोग में सुनवाई के दौरान अस्पताल के डॉक्टरों ने स्वीकार किया कि मरीज को इंजेक्शन देकर पुनर्जीवन (रिवाइवल) का प्रयास किया गया था।
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इतना ही नहीं, अस्पताल सीसीटीवी फुटेज, विजिटर रजिस्टर और अन्य आवश्यक दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं कर सका। मृतक के पिता को मेडिकल रिपोर्ट तक नहीं दी गई, जिससे स्वतंत्र चिकित्सकीय राय ली जा सके। ये सभी तथ्य अस्पताल की लापरवाही को सिद्ध करने वाले माने गए।
आयोगों का फैसला
दावा सही मानते हुए पहले जिला उपभोक्ता आयोग ने हिना सोनी के पक्ष में निर्णय सुनाया। इसके विरुद्ध सुयश हॉस्पिटल ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की, लेकिन न्यायमूर्ति गौतम चौरडिया और सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा की पीठ ने अपील को खारिज करते हुए जिला आयोग के फैसले को बरकरार रखा।




