नेशनल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि अगर महिला निजी जगह पर नहीं है, तो उसकी सहमति के बिना उसकी फोटो लेना या वीडियो बनाना आईपीसी की धारा 354C के तहत अपराध नहीं माना जाएगा। जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को कायम रखते हुए आरोपी तुहिन कुमार बिस्वास को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
कोर्ट ने पुलिस और ट्रायल कोर्ट की भी कड़ी आलोचना की, कहा कि “ताक-झांक” का आरोप इसलिए लगाया गया क्योंकि महिला को विवादित संपत्ति में जाते हुए वीडियो बनाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में मर्यादा भंग के अपराध के सभी जरूरी तत्व पूरे नहीं होते।
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मामले का पूरा विवरण
शिकायतकर्ता 18 मार्च 2020 को कुछ वर्कर्स के साथ कोलकाता के साल्ट लेक स्थित एक संपत्ति में जा रही थी। इसी दौरान आरोपी ने उसका वीडियो बनाया। महिला ने शिकायत की कि यह निजता में दखल और मर्यादा भंग है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्रिमिनल कोर्ट को ऐसे कमजोर मामलों को सुनवाई तक पहुँचने से रोकना चाहिए, ताकि अदालत का समय बर्बाद न हो। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला पूरी तरह सिविल विवाद था और इसे उसी तरह सुलझाया जाना चाहिए था, न कि क्रिमिनल प्रक्रिया के माध्यम से।
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संपत्ति विवाद से जुड़ा मामला
यह मामला दो भाइयों के बीच संपत्ति विवाद से उत्पन्न हुआ था। आरोपी तुहिन कुमार बिस्वास ने कथित तौर पर महिला को संपत्ति में प्रवेश करते हुए रिकॉर्ड किया।
शिकायत और सबूतों के अभाव के बावजूद, पुलिस ने चार्जशीट दायर की। ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट ने आरोपी की बरी करने की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा।




