रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन खाद संकट को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने प्रदेश में खाद की भारी कमी और कालाबाजारी को लेकर सरकार को घेरा। कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने प्रश्नकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया और प्रदेश में खाद की आपूर्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
उमेश पटेल ने सवाल किया कि जून तक केवल 50 फीसदी खाद का भंडारण हुआ है, ऐसे में खरीफ सीजन में किसानों को पर्याप्त खाद कैसे मिलेगी? इस पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार के संपर्क में है और खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि जहां डीएपी की कमी है, वहां अन्य वैकल्पिक उर्वरकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, साथ ही डीएपी नैनो को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
Read Also- मानसून सत्र के चौथे दिन सियासी संग्राम तय: भर्ती घोटालों से लेकर अहम विधेयकों तक गरमाएगा विधानसभा का माहौल
मंत्री ने कहा कि 20 जुलाई तक प्रदेश में 18,850 मैट्रिक टन खाद, यानी कुल 24 रैक, पहुंचने वाले हैं, जिनमें डीएपी और एनपीके दोनों शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि खाद की आपूर्ति को लेकर कोई गंभीर संकट नहीं है और स्थिति नियंत्रण में है।
लेकिन मंत्री के जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तीखा सवाल किया कि जब आपूर्ति इतनी हो रही है तो फिर डीएपी की खुलेआम कालाबाजारी क्यों हो रही है? उन्होंने सरकार पर किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
Read Also- जमीन विवाद बनी मौत की वजह: नाबालिग की सब्बल से हत्या, पड़ोसी रिश्तेदार गिरफ्तार
कृषि मंत्री ने जवाब में कहा कि अब तक 1 लाख 72 हजार मैट्रिक टन डीएपी खाद प्रदेश में आ चुका है और अगले पांच दिनों में 18 हजार मैट्रिक टन और पहुंच जाएगा। उन्होंने दोहराया कि खाद की उपलब्धता को लेकर कोई घबराने की जरूरत नहीं है।
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन के गर्भगृह में पहुंचकर “खाद की कालाबाजारी बंद करो” जैसे नारे लगाए और बाद में सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जमीनी हालात से बेखबर है और किसानों की परेशानियों को लेकर कोई ठोस नीति नहीं बना पा रही है।




