SATNAMI SAMAJ LATEST NEWS. रायपुर जिले के तिल्दा जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष टिकेश्वर मनहर ने अपने ही सतनामी समाज में गुरु प्रथा ख़त्म करवाने का ऐलान कर दिया है। एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कमेंट कर यह बात कही है। सतनामी समाज से गुरु प्रथा हटवाने की बात कहने वाले टिकेश्वर मनहर कोई और नहीं बल्कि भाजपा नेता वेद राम मनहर के छोटे भाई है और वह खुद भी भाजपा के कार्यकर्ता है।
टिकेश्वर मनहर ने फेसबुक ग्रुप ‘छत्तीसगढ़ सतनाम समाज’ के जैतखाम के अपमान वाले एक पोस्ट में कमेंट किया है कि ‘ मैं आप लोगों से पूछना चाहता हूं कि, क्या गुरु घासीदास बाबा जी ने अपने वंशजों को गुरु मानो या उन लोगों की पूजा करो! बोला है क्या? आज कल जो लोग अपने आप को गुरु बता रहे हैं, वो लोग पूरे समाज का शोषण कर रहे हैं। बोलने के लिए बहुत कुछ है। समय आने दो गुरु प्रथा बंद कर के दिखाऊंगा।

टिकेश्वर को गुरुओं से क्यों है पीड़ा?
टिकेश्वर मनहर का अपने ही गुरुओं के प्रति यह गुस्सा इसलिए है क्योंकि आरंग विधायक गुरु खुशवंत साहेब के भाजपा में शामिल होने के बाद उनके बड़े भाई वेद राम मनहर की राजनीतिक महत्वकांक्षाओं को गहरा धक्का पहुंचा था। वेद राम मनहर पिछले दो-तीन सालों से भाजपा में शामिल होकर आरंग से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। आरंग में उनकी सक्रियता से वेदराम की दावेदारी भी मजबूत थी, लेकिन एन चुनाव के वक्त गुरु खुशवंत साहेब की भाजपा में एंट्री हुई और फिर वेदराम मनहर को मैनेज कर टिकट गुरु खुशवंत की झोली में डाल दी गई और इस तरह एक बार फिर से वेदराम की राजनीतिक महत्वकांक्षाओं की भाजपा ने हत्या कर दिया।
पहले कांग्रेस के थे वेदराम और टिकेश्वर
वेदराम मनहर और उनके छोटे भाई टिकेश्वर मनहर पहले कांग्रेस के थे। 2018 के चुनाव में वेदराम मनहर ने कांग्रेस से भी आरंग विधानसभा सीट से टिकट मांगा था, लेकिन पूर्व विधायक डॉ. शिव कुमार डहरिया पार्टी में अपने वर्चस्व के बदौलत आरंग से टिकट ले लिए और 2018 के चुनाव में वे जीत भी गए। इसके बाद वेदराम मनहर भाजपा के संपर्क में आने लगे और आखिरकार कांग्रेस में भविष्य को नहीं देखते हुए उन्होंने अपने छोटे भाई और समर्थकों के साथ भाजपा आ गए और फिर आरंग विधानसभा में फोकस कर मेहनत करने लगे, पर भाजपा ने मेहनत की जगह समाज के गुरु खुशवंत साहेब को महत्व दिया।
गुरुओं के प्रति अभी क्यों निकल रही है टिकेश्वर की भड़ास?
सतनामी समाज के गुरुओं का राजनीति में दिलचस्पी और सामाजिक मामले की उपेक्षा के चलते इस समय समाज में गुरुओं का विरोध हो रहा है। हाल ही में अभी गिरौदपुरी धाम के अमर गुफा में असामजिक तत्वों द्वारा जैतखाम को काटे जाने की वजह से समाज आक्रोशित है। इस पर गुरुओं की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं और इसी बीच अब टिकेश्वर फायदा तलासने लगे हैं।




