आशीष पदमवार
बीजापुर। जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक अंतर्गत जांगला संकुल के ककाड़ीपारा गांव में शिक्षा विभाग के युक्तियुक्तीकरण के फैसले के खिलाफ ग्रामीणों ने अनोखी पहल करते हुए बंद किए गए प्राथमिक विद्यालय को अपने स्तर पर शुरू कर रखा है। उल्लेखनीय है कि यही जांगला गांव वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के कारण राष्ट्रीय सुर्खियों में आया था।
शिक्षा विभाग के आदेश के तहत ककाड़ीपारा के प्राथमिक विद्यालय को बंद कर बच्चों को 5 किलोमीटर दूर जांगला के स्कूल में भेजने को कहा गया था। दुर्गम क्षेत्र और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए ग्रामीणों ने इस निर्णय का विरोध करते हुए गांव में ही शिक्षा की व्यवस्था शुरू कर दी।
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ग्रामीणों ने स्कूल की रसोइया पार्वती कोवासी को शिक्षिका की जिम्मेदारी सौंपी है। वे अब बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ उन्हें मध्याह्न भोजन भी उपलब्ध कराती हैं। इस भोजन की व्यवस्था गांव के लोग आपसी सहयोग से कर रहे हैं, हर दिन एक परिवार भोजन उपलब्ध कराता है। वहीं, गांव के युवा हरिराम पोयाम बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने में मदद कर रहे हैं।
ग्रामीणों की इस पहल को समर्थन देने मंगलवार को क्षेत्रीय विधायक विक्रम मंडावी स्वयं ककाड़ीपारा पहुंचे। उन्होंने बच्चों, ग्रामीणों और पार्वती कोवासी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने बच्चों को स्कूल ड्रेस, कॉपी, पेन, खेल सामग्री और मध्याह्न भोजन के लिए राशन भी वितरित किया। उन्होंने ग्रामीणों के शिक्षा के प्रति जज़्बे की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रयास पूरी राज्य और देश के लिए प्रेरणा है।
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विधायक मंडावी ने कहा, शिक्षा प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन भाजपा की सरकार युक्तियुक्तीकरण के नाम पर आदिवासी बच्चों से यह अधिकार छीन रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मांग करेंगे कि हर गांव में स्कूल खोला जाए और ककाड़ीपारा जैसे गांवों की आवाज सुनी जाए।
ग्रामीणों ने विधायक को बताया कि कई बार कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी से गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में गांववासियों ने आपसी सहयोग से स्कूल का संचालन जारी रखने का संकल्प लिया है।




