नई दिल्ली। भारत में मतदान के दौरान लगाई जाने वाली नीली स्याही केवल चुनाव का प्रतीक नहीं, बल्कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता की पहचान बन चुकी है। इसकी खासियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दुनिया के 35 से अधिक देश इस स्याही को भारत से खरीदते हैं। इस स्याही के निर्माण का विशेषाधिकार मैसूर पेंट एंड वार्निश लिमिटेड के पास है, जो 1962 से कर्नाटक सरकार के अधीन कार्यरत है। इस स्याही के निर्माण का फॉर्मूला गोपनीय है, हालांकि इसमें सिल्वर नाइट्रेट का उपयोग किया जाता है।
अमिट निशान की शुरुआत
आजादी के बाद जब देश में पहली बार आम चुनाव हुए तो फर्जी मतदान और गड़बड़ियों की आशंका बढ़ गई थी। इस समस्या से निपटने के लिए चुनाव आयोग ने नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी ऑफ इंडिया से ऐसी स्याही तैयार करने का अनुरोध किया, जिसे मिटाया न जा सके। इसके बाद इस स्याही को बनाने का कार्य मैसूर पेंट एंड वार्निश लिमिटेड को सौंपा गया।
35 देशों तक पहुंची भारतीय स्याही
कंपनी के प्रबंध निदेशक के. इरफान के अनुसार, चुनावी स्याही कनाडा, घाना, नाइजीरिया, मंगोलिया, मलेशिया, नेपाल, कंबोडिया, दक्षिण अफ्रीका और मालदीव जैसे देशों में निर्यात की जा रही है। भारत में इसे मतदाता की उंगली पर लगाया जाता है, जबकि अन्य देशों में इसका उपयोग अलग-अलग तरीकों से किया जाता है। कंबोडिया और मालदीव में उंगली को स्याही में डुबोया जाता है, वहीं तुर्की में इसे नॉजल्स की मदद से लगाया जाता है।
विदेशों में बढ़ती मांग के प्रमुख कारण
- फर्जी वोटिंग पर रोक: भारतीय स्याही अपनी टिकाऊ प्रकृति के लिए जानी जाती है। यह 15 से 20 दिन तक नहीं मिटती, जिससे फर्जी मतदान की संभावना कम हो जाती है।
- विशेष रासायनिक फॉर्मूला: इसका निर्माण सिल्वर नाइट्रेट और अन्य गोपनीय तत्वों से किया जाता है, जो इसे विशिष्ट बनाता है।
- हर मौसम में असरदार: यह स्याही किसी भी जलवायु में टिकाऊ रहती है और त्वचा पर लगाने के बाद आसानी से नहीं हटती।
- सस्ती और भरोसेमंद: भारतीय स्याही उच्च गुणवत्ता के साथ कम कीमत में उपलब्ध है, यही कारण है कि विकासशील देश इसे प्राथमिकता देते हैं।
- लोकतांत्रिक भरोसे का प्रतीक: भारत में दशकों से बिना किसी विवाद के इस स्याही का उपयोग किया जा रहा है, जिससे यह विश्व स्तर पर भरोसे का प्रतीक बन चुकी है।
भारतीय अमिट स्याही आज न केवल देश के लोकतंत्र की पहचान है, बल्कि यह दुनिया भर में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता का प्रतीक बन गई है।




