नई दिल्ली। आगामी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को ध्यान में रखते हुए देशभर के अस्पतालों में तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी बीच अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि नियमित योगाभ्यास हल्के और मध्यम स्तर के अल्जाइमर रोगियों की संज्ञानात्मक क्षमता को बेहतर बनाने में प्रभावी साबित हो सकता है।
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एम्स के एनाटॉमी और न्यूरोलॉजी विभाग के संयुक्त प्रयास से किया गया यह अध्ययन प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल फ्रंटियर्स इन एजिंग में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता और एनाटॉमी विभाग की प्रोफेसर डॉ. रीमा दादा ने बताया कि यह अध्ययन वृद्धाश्रमों में रहने वाले 30 बुजुर्गों पर किया गया, जिनमें 18 पुरुष और 12 महिलाएं शामिल थीं। इन सभी को हल्के से मध्यम स्तर का अल्जाइमर था।
डॉ. दादा के अनुसार, अल्जाइमर एक प्रगतिशील मस्तिष्क रोग है, जो स्मृति, सोचने की क्षमता और व्यवहार को प्रभावित करता है। अध्ययन में यह पाया गया कि नियमित रूप से योग करने वाले मरीजों में मानसिक तनाव, अवसाद और हाइपरटेंशन की समस्या में भी कमी देखी गई, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ।
अल्जाइमर पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकता, लेकिन इसके लक्षणों को नियंत्रित कर मरीज के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, वर्तमान में दुनिया भर में करीब पांच करोड़ लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं और 65 वर्ष से अधिक उम्र के हर दस में से एक व्यक्ति इस रोग का शिकार है। अनुमान है कि वर्ष 2050 तक यह संख्या 22 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
ऐसे में यह अध्ययन अल्जाइमर मरीजों के इलाज में योग को एक प्रभावी सहायक विकल्प के रूप में प्रस्तुत करता है। एम्स के विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित योगाभ्यास से न केवल मानसिक स्वास्थ्य सुधरता है, बल्कि रोग की गति को भी धीमा किया जा सकता है।




