जशपुर। जिले के पत्थलगांव वन परिक्षेत्र के बालाझर चिमटापानी गांव में हाथी के हमले में सालिक राम टोप्पो की मौत के बाद मुआवजे को लेकर अनोखा विवाद सामने आया है। सरकार ने मृतक के परिजनों को 6 लाख रुपए मुआवजे के रूप में देने की घोषणा की, लेकिन अचानक छह महिलाओं ने खुद को सालिक की पत्नी और वारिस बताते हुए इसका दावा ठोक दिया।
पत्थलगांव जनपद के बालाझर पंचायत के सरपंच जयरनाथ राम ने बताया कि मृतक की मौत के बाद सुगंदी बाई और बुधियारो बाई के अलावा सरगुजा से चार महिलाएं मुआवजा लेने आई थीं। पंचायत ने सभी से वारिस होने का वैध दस्तावेज मांगने पर केवल दो महिलाओं ने प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया।
Read Also- साय मंत्रिमंडल का हुआ विस्तार.. नए 3 मंत्रियों को CM ने दी बधाई
पत्थलगांव रेंजर कृपा सिंधु पैकरा ने बताया कि छह महिलाएं या उनके परिजन मुआवजे की राशि पाने के लिए दावा कर रहे हैं। इनमें से कई दूसरे जिले से वारिस होने का प्रमाण पत्र लेकर आई हैं। रेंजर ने कहा कि अंतिम निर्णय उसी पंचायत के प्रमाण पत्र के आधार पर लिया जाएगा, जहां सालिक राम रहते थे और जहां हादसा हुआ।
हर महिला ने अपने दावे के समर्थन में अलग-अलग तर्क पेश किए हैं। 50 वर्षीय सुगंदी बाई के बेटे भागवत टोप्पो ने कहा कि उनकी मां सालिक राम की पहली पत्नी थीं और मुआवजे का पहला हक उन्हीं का है। उन्होंने यह भी बताया कि बुधियारो बाई उनकी सौतेली मां हैं और अन्य दावे निरर्थक हैं।
Read Also- हाईकोर्ट ने नेशनल हाईवे पर दुर्घटनाओं व आवारा मवेशियों पर जताई चिंता, तुरंत कार्रवाई के दिए निर्देश
48 वर्षीय संगीता बाई का दावा है कि सालिक ने उन्हें मंगलसूत्र पहनाया था, इसलिए असली पत्नी वही हैं। 46 वर्षीय शिला बाई ने कहा कि वह सालिक के साथ पत्नी के रूप में दो साल तक रही। 50 वर्षीय अनीता बाई ने सीतापुर की विशुनपुर पंचायत से प्रमाण पत्र दिखाया है, जो उनके रिश्ते का सबूत है। 48 वर्षीय मीना बाई का कहना है कि उसने सालिक राम के साथ सबसे ज्यादा समय बिताया है, इसलिए मुआवजे की हकदार वही हैं।
बुधियारो बाई का दावा है कि पिछले 20 साल से सालिक राम उनके साथ रह रहे थे और मृत्यु तक उनके साथ ही रहे। उन्होंने कहा कि सालिक का हर कदम उन्होंने अपने साथ देखा और संभाला।




