बिलासपुर। राष्ट्रीय राजमार्गों पर मवेशियों के जमघट और सड़क किनारे ढाबों की वजह से लगातार हो रही दुर्घटनाओं को लेकर हाई कोर्ट ने कड़ा आदेश दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने मंगलवार को एनएच पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई और राज्य सरकार व एनएचएआई को स्थायी समाधान के लिए तुरंत ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए।
कोर्ट ने उठाया संज्ञान
हाई कोर्ट ने एनएचएआई और प्रदेश की सड़कों पर मवेशियों के जमघट से होने वाले हादसों और लगातार हो रही मवेशियों की मौतों पर संज्ञान लिया था। 31 जुलाई को सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव और एनएचएआई प्रोजेक्ट डायरेक्टर को शपथ पत्र देने के आदेश दिए गए थे।
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कंपनी ने जताई चिंता
बिलासपुर-पथरापाली रोड प्राइवेट लिमिटेड ने कहा कि स्थायी गौशाला न होने के कारण सड़कों पर मवेशियों की समस्या बनी हुई है। एग्रीमेंट के अनुसार यह उनकी जिम्मेदारी नहीं है, लेकिन सार्वजनिक सुरक्षा के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं।
एनएचएआई ने उठाए कदम
- मवेशियों को हटाने और निगरानी के लिए पेट्रोलिंग वाहन तैनात।
- पेंड्रीडीह में 20×20 मीटर मवेशी चबूतरा निर्माण।
- रतनपुर और बेलमुंडी में शेड प्रस्तावित।
- 7.35 किमी लंबी बांस की बाड़ के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू।
- टोल प्लाजा पर जागरूकता घोषणाएं और पर्चे वितरण।
- दिन-रात मजदूर और टीमें लगाकर मवेशियों को हटाने का काम।
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मवेशियों के लिए रिफलेक्टिव नेक बेल्ट और हाईवे पर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था।




