पीथमपुर
मध्य प्रदेश के पीथमपुर कस्बे में स्थित एक डिस्पोजल प्लांट में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री का 337 टन जहरीला कचरा अब इतिहास बन चुका है। लगभग चार दशक बाद, इस काले अध्याय का अंत हुआ है। सोमवार को अधिकारियों ने जानकारी दी कि कचरा जलाने की यह प्रक्रिया छह महीने की मेहनत के बाद पूरी हुई।
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भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े कचरे का हुआ अंत
यह जहरीला कचरा 1984 की भोपाल गैस त्रासदी से जुड़ा हुआ था। 2-3 दिसंबर की रात यूनियन कार्बाइड के कीटनाशक कारखाने से मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) नामक घातक गैस का रिसाव हुआ था। यह दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक त्रासदियों में से एक है, जिसमें 5,479 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और हजारों जिंदगी भर के लिए विकलांग हो गए थे।
5 मई से शुरू हुई प्रक्रिया, 30 जून को हुआ समापन
धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित संयंत्र में यह कचरा मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के निर्देश पर जलाया गया। कचरा जलाने की प्रक्रिया 5 मई 2025 को शाम 7:45 बजे शुरू हुई और 29-30 जून की रात 1 बजे समाप्त हुई। इससे पहले, ट्रायल के रूप में 30 टन कचरा तीन बार जलाया गया था।
विशेषज्ञों की निगरानी में चला कार्य
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी श्रीनिवास द्विवेदी ने बताया कि कचरे को 270 किलो प्रति घंटे की दर से जलाया गया, और यह पूरा काम केंद्रीय व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के विशेषज्ञों की निगरानी में हुआ।
जनता की चिंता, सरकार का भरोसा
शुरुआत में स्थानीय लोगों ने पर्यावरण और स्वास्थ्य को लेकर विरोध किया था, लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया से किसी भी व्यक्ति की सेहत पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा।
राख को सुरक्षित किया गया
कचरा जलने के बाद जो राख बची है, उसे लीक-प्रूफ शेड में बोरी में पैक करके रखा गया है। अब इन अवशेषों को वैज्ञानिक तरीके से विशेष लैंडफिल सेल में जमीन के नीचे दफनाया जाएगा, जिसका निर्माण नवंबर तक पूरा होने की उम्मीद है।
- यह प्रक्रिया न केवल वातावरण की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि एक ऐतिहासिक त्रासदी से जुड़ी पीड़ा का प्रतीकात्मक अंत भी है।




