सिंगापुर। भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ( India CDS) जनरल अनिल चौहान ने सिंगापुर में हुए शांगरी-ला डायलॉग 2025 में भाग लिया। यहां सीडीएस अनिल चौहान ने पाकिस्तान और आतंकवाद के रिश्ते को बेनकाब करते हुए भारत द्वारा आतंकवाद के खिलाफ ‘नई लक्ष्मण रेखा’ खींचने की बात का जिक्र भी किया। उन्होंने यह भी बताया कि इस क्षेत्र में बढ़ती परेशानियों के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है।
भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने कहा कि ताली एक हाथ से नहीं बजती है। पाकिस्तान को भी स्थिरता के लिए कदम बढ़ाने होंगे। जनरल चौहान ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर इसलिए जरूरी था क्योंकि आतंकवाद के कारण भारत की सहनशक्ति की सीमा पार हो चुकी थी।
सिंगापुर में आयोजित शांग्री-ला डायलॉग सिक्योरिटी समिट के दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति पर कहा कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ नई ‘रेड लाइन’ खींच दी है। भारत ने कई बार पाकिस्तान से दोस्ती करने की कोशिश की, लेकिन हर बार पाकिस्तान ने दुश्मनी दिखाई। सीडीएस ने उम्मीद जताई कि सैन्य कार्रवाई से पड़ोसी मुल्क कुछ सबक जरूर सीखेगा।
पाकिस्तान में 300 किमी तक टारगेट
उन्होंने कहा कि हम 300 किलोमीटर तक की एयर डिफेंस को सटीकता के साथ टारगेट करने में सक्षम थे और पाकिस्तान के अंदर तक एयरबेस और बुनियादी ढांचे को टारगेट बनाया गया। यह हमारी मजबूत एयर डिफेंस क्षमता को दिखाता है। जनरल चौहान ने कहा कि आतंकवादियों की वजह से दुनिया में अस्थिरता बढ़ रही है और वे संघर्षों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। जनरल चौहान ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नई ‘रेड लाइन’ का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने राजनीतिक रूप से जो किया है, उसने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टोलरेंस की एक नई रेड लाइन खींच दी है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि इस स्पेशल ऑपरेशन से हमारे दुश्मनों को भी कुछ सबक मिलेगा और वे सीखेंगे कि यह भारत की सहनशीलता की सीमा है।
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर की कमियों से ली सीख: सीडीएस
उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में थलसेना, वायुसेना और नौसेना ने साझा इंटेलिजेंस, प्लानिंग और लॉजिस्टिक्स का इस्तेमाल किया। ऑपरेशन में मिली कमियों से सीख लेकर भारत अपना थिएटर कमांड तैयार करेगा। हालांकि, इसके तैयार होने की समय सीमा अभी तय नहीं की गई है। सीडीएस ने कहा कि आत्मनिर्भरता का मतलब हर तरह के हथियार भारत में बनाना नहीं है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए भारत को मित्र देशों के साथ साझेदारी की जरूरत होगी।




