नई दिल्ली। भारत का चावल निर्यात अप्रैल-मई 2025 में लगभग 60 फीसदी तक गिर गया है। इसके पीछे वैश्विक मांग में गिरावट, अधिक उत्पादन और रिकॉर्ड स्टॉक को प्रमुख कारण माना जा रहा है। इस अवधि में 5 फीसदी टूटे सफेद चावल की कीमत 384 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई, जो पांच सालों में सबसे निचला स्तर है। वहीं, परबॉइल्ड चावल की कीमत 377 डॉलर प्रति टन (FOB) रही। सितंबर 2024 में भारत द्वारा निर्यात प्रतिबंध हटाए जाने के बाद चावल की सप्लाई में इजाफा हुआ, लेकिन मांग में गिरावट के चलते कीमतें तेजी से गिरीं। परबॉइल्ड चावल का निर्यात जनवरी 2025 तक 12.52 लाख टन तक पहुंच गया था, लेकिन मई 2025 में यह घटकर 2.07 लाख टन रह गया। सफेद चावल का निर्यात भी नवंबर में 8.07 लाख टन से गिरकर मई में 2.92 लाख टन तक सीमित रह गया।
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विशेषज्ञों का कहना है कि फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के रिकॉर्ड स्टॉक ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। 1 जून 2025 तक एफसीआई के पास 37.99 लाख टन चावल और 32.26 लाख टन बिना पिसे धान का स्टॉक था। एफसीआई द्वारा इथेनॉल उत्पादन के लिए चावल 22.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा रहा है, जिससे वैश्विक बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति की आशंका और बढ़ गई है। राजथी ग्रुप के एम. मदन प्रकाश का कहना है कि निकट भविष्य में मांग में तेजी की संभावना कम है। ऐसे में USDA द्वारा अनुमानित 24 मिलियन टन चावल निर्यात का लक्ष्य अधूरा रह सकता है। वर्तमान स्थिति चावल व्यापारियों और निर्यातकों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
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