नई दिल्ली। अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद अब जांच एजेंसियों की नजर ब्लैक बॉक्स और DVR पर टिक गई है। इस दुखद हादसे में 265 लोगों की मौत हुई, और अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर गलती कहां हुई? विमान के कॉकपिट में क्या-क्या हुआ? इन सवालों के जवाब अब ब्लैक बॉक्स और डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) से मिलने की उम्मीद है।
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कहां मिला ब्लैक बॉक्स?
दुर्घटना के बाद ब्लैक बॉक्स बीजे मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की छत पर बरामद किया गया, जहां एअर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। विमान हादसे के वक्त करीब 1000 डिग्री सेल्सियस तापमान की आग में जल रहा था, फिर भी ब्लैक बॉक्स और DVR सुरक्षित मिल गए हैं।
ब्लैक बॉक्स क्या होता है और यह क्यों जरूरी है?
ब्लैक बॉक्स असल में दो हिस्सों से बना होता है –
फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) – जो विमान की ऊंचाई, गति, इंजन की स्थिति सहित करीब 3,500 पैरामीटर्स रिकॉर्ड करता है।
कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) – जो पायलट और को-पायलट की बातचीत, चेतावनी संकेत और अन्य ध्वनियों को रिकॉर्ड करता है।
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इसके अलावा, DVR भी विमान के भीतर लगे कैमरों की फुटेज रिकॉर्ड करता है, जिसमें केबिन और कॉकपिट की दृश्य जानकारी होती है। इससे हादसे से पहले के पलों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है।
ब्लैक बॉक्स का इतिहास और मजबूती
ब्लैक बॉक्स की तकनीक की शुरुआत 1930 के दशक में हुई थी। इसका रंग ऑरेंज होता है ताकि मलबे में आसानी से दिख सके, लेकिन नाम “ब्लैक बॉक्स” इसलिए पड़ा क्योंकि यह पहले एक प्रकाश-रोधी बॉक्स में बंद रहता था। आज के आधुनिक ब्लैक बॉक्स में ठोस-राज्य मेमोरी चिप्स होती हैं जो न तो आसानी से टूटती हैं, न ही आग, पानी, या टक्कर से क्षतिग्रस्त होती हैं।
जांच से जुड़े अधिकारी क्या कह रहे हैं?
जांच अधिकारियों के अनुसार, ब्लैक बॉक्स और DVR की डिकोडिंग के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फ्लाइट AI171 में तकनीकी खराबी, पायलट की गलती या कोई अन्य चूक दुर्घटना की वजह बनी। यह डेटा विमान के उड़ान भरने से लेकर क्रैश होने तक की पूरी कहानी बयान करेगा।
अब सबकी निगाहें इस ब्लैक बॉक्स से निकलने वाले सच पर टिकी हैं, जिससे न सिर्फ 265 लोगों की मौत के पीछे की वजह सामने आएगी, बल्कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका भी जा सकेगा।




