@धर्मेंद्र यादव
ख़बरवाद डॉट कॉम, धमतरी। जिले के नगरी ब्लॉक में आज भी ऐसे गांव है, जहां अंधेरे को काटने के लिए आज भी चिमनी का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसा इसलिए कि सरकार यहां आज तक बिजली नहीं पहुंचा सकी है।
इतना ही नहीं यहां मूलभूत सुविधाओं का भी ग्रामीणों को टोटा है। सालों से सरकार और प्रशासन से अपनी मांगों को रख-रखकर यहां के ग्रामीण अब थक गए है। लेकिन सरकार या फिर प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा यहां की समस्या हल करने की पहल अभी तक नहीं की है। लिहाजा अब उन्हें शहर की ओर विरोध के स्वर लेकर रुख करना पड़ रहा है।
हम बात कर रहे हैं नगरी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले रिसगांव, करही, खल्लारी और फरसगांव की। यह गांव सीतानदी अभ्यारण्य के इलाके में आता है। यहां रहने वाले ग्रामीणों ने बताया है कि भीरागांव से खल्लारी चमेंदा और रिसगांव से जोरातराई तक बिजली की सुविधा नहीं है। हमने शासन प्रशासन से कई बार बिजली का कनेक्शन देने के लिए कहा है। लेकिन आज तक हमें बिजली मुहैया नहीं हुई।

ग्रामीणों ने आगे बताया कि इलाके में आधा दर्जन नदी नालों में पुल और पुलिया की जरूरत है। गांवों में सड़क नहीं है। गर्मियों के दिन में तो जैसे तैसे आवागमन हो जाता है, लेकिन बरसात के दिनों में बात जान पर आ जाती है। यहां स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर भी कुछ नहीं है। हमने रिसगांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने की मांग की है। इसके अलावा पानी की टंकी और मुख्य चौक – चौराहों पर लाइट की व्यवस्था की मांग की। लेकिन अब तक पूरा नहीं किया गया। इस वजह से अब हम शासन प्रशासन से लड़ने के लिए मजबूर है।

रविवार को सीता नदी अभ्यारण्य इलाके के 25 गांवों से हजारों की संख्या में ग्रामीण धमतरी की ओर निकले है। वह सोमवार को कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे और अपने गांव में मूलभूत सुविधाओं के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन समेत प्रधानमंत्री के अलावा राज्य और केंद्र के वन मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे।




