धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में बुधवार को बादल फटने और मूसलाधार बारिश से भारी तबाही मची। कुल्लू और कांगड़ा जिलों में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन की चपेट में आकर पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लापता बताए जा रहे हैं। दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर के राजौरी, पुंछ, डोडा और कठुआ जिलों में भी मौसम का कहर देखने को मिला, जहां दो बच्चों समेत तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
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प्राकृतिक आपदा की ये घटनाएं बुधवार दोपहर को हुईं, जब अचानक मौसम ने रुख बदला और कई इलाकों में भारी बारिश के चलते नदियां उफान पर आ गईं। कुल्लू जिले के बंजार और कांगड़ा के पालमपुर क्षेत्र में नाले और झरने भारी बारिश से रौद्र रूप में बहने लगे, जिससे कई घर, वाहन और खेत पानी में बह गए। राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर तैनात हैं।
मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 25 जून से 1 जुलाई तक हिमाचल प्रदेश और आसपास के राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। विशेष रूप से 29 जून के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जिसमें ऊना, बिलासपुर, सोलन, शिमला, सिरमौर, कांगड़ा, चंबा, कुल्लू और मंडी जिलों में बहुत भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की चेतावनी दी गई है।
IMD के अनुसार, 26 और 27 जून को हल्की से मध्यम बारिश होगी, लेकिन 28 जून से बारिश की तीव्रता बढ़ेगी। 29 और 30 जून को कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा होने की संभावना है। इस अवधि में स्थानीय लोगों और पर्यटकों को नदियों के किनारे, ढलानों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
प्रशासन अलर्ट मोड पर
प्रशासन ने स्कूलों को बंद रखने के निर्देश दिए हैं और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली और सड़क संपर्क भी बाधित हुआ है। राज्य सरकार ने सभी जिलों में आपातकालीन केंद्र सक्रिय कर दिए हैं और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
यह मानसूनी कहर पहाड़ी राज्यों में जान-माल का भारी नुकसान कर रहा है, जिससे अगले कुछ दिनों तक और सतर्कता बरतने की जरूरत है।




