रायपुर/नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने देशभर के निष्क्रिय पंजीकृत अप्रमाणित राजनीतिक दलों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग ने बताया है कि देश के 345 ऐसे पंजीकृत राजनीतिक दल चिन्हित किए गए हैं जिन्होंने वर्ष 2019 से बीते छह वर्षों के दौरान न तो किसी भी चुनाव में भाग लिया है और न ही उनके सक्रिय कार्यालय अस्तित्व में पाए गए हैं।
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निर्वाचन आयोग ने इन दलों को सूची से हटाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। इस प्रक्रिया के तहत छत्तीसगढ़ में भी कई ऐसे दलों की पहचान की गई है जिन्हें कारण बताओ नोटिस भेजा गया है और सुनवाई का अवसर प्रदान किया जा रहा है।
सुनवाई के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी इन दलों को डीलिस्ट (सूची से बाहर) करने संबंधी प्रतिवेदन भारत निर्वाचन आयोग को भेजेंगे। अंतिम निर्णय आयोग द्वारा लिया जाएगा।
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छत्तीसगढ़ के इन दलों को भेजा गया है नोटिस:
- छत्तीसगढ़ एकता पार्टी
पता: 182/2, वार्ड नंबर 08, बड़े पदरमुड़ा रोड, जमगहन, तहसील मालखरौदा, जिला जांजगीर-चांपा - छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा
पता: पोस्ट ऑफिस दल्ली राजहरा, जिला दुर्ग - छत्तीसगढ़ समाजवादी पार्टी
पता: रामानुजगंज रोड, संजय पार्क के सामने, अंबिकापुर - छत्तीसगढ़ संयुक्त जातीय पार्टी
पता: बजरंग नगर, तात्यापारा वार्ड, रायपुर - छत्तीसगढ़ विकास पार्टी
पता: A-12, फ्लैश विहार, न्यू पुरैना, पोस्ट रविग्राम, रायपुर - पृथक बस्तर राज्य पार्टी
पता: 8, सीनियर H.I.G., सेक्टर-3, शंकर नगर, रायपुर - राष्ट्रीय आदिवासी बहुजन पार्टी
पता: प्लॉट नंबर 4, पुष्पक नगर, जुनवानी रोड, भिलाई, जिला दुर्ग - राष्ट्रीय मानव एकता कांग्रेस पार्टी
पता: गुरुद्वारा के पीछे, स्टेशन रोड, रायपुर - राष्ट्रीय समाजवादी स्वाभिमान मंच
पता: प्लॉट नंबर 33/34, लक्ष्मी नगर, रिसाली, भिलाई, जिला दुर्ग
राजनीतिक दलों का पंजीकरण और आयोग की निगरानी
भारत में किसी भी राजनीतिक दल का पंजीकरण लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के अंतर्गत किया जाता है। एक बार पंजीकृत होने के बाद दलों को आयकर छूट समेत कई विशेष सुविधाएं मिलती हैं।
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चुनाव आयोग का कहना है कि पंजीकृत अप्रमाणित राजनीतिक दलों की नियमित समीक्षा जरूरी है ताकि निष्क्रिय, अस्तित्वहीन या फर्जी गतिविधियों में संलिप्त दलों को समय रहते सूची से हटाया जा सके। आयोग के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना है, ताकि राजनीतिक दलों का पंजीकरण केवल वैध और सक्रिय राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित रहे तथा इसका किसी भी प्रकार से दुरुपयोग न हो सके।




