नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2026 में आवासीय संपत्ति की बिक्री में 10-12% की दर से वृद्धि की संभावना जताई गई है, जो पिछले वित्त वर्ष 2025 की 12-14% वृद्धि दर से कम है। क्रिसिल रेटिंग्स ने मंगलवार को जारी अपनी रिपोर्ट में बताया कि कोविड के बाद के तीन वर्षों में जबरदस्त रिकवरी के बाद अब रियल एस्टेट क्षेत्र में मांग स्थिर होती दिख रही है।
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रिपोर्ट के अनुसार, प्रॉपर्टी की औसत कीमतों में 4-6 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। डेवलपर्स की कर्जमुक्त बैलेंस शीट और मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल इस क्षेत्र को स्थिरता प्रदान कर रहे हैं।
प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट में तेजी
क्रिसिल के मुताबिक देश के टॉप 7 शहरों में प्रीमियम और लग्जरी घरों की मांग में जबरदस्त उछाल देखा गया है। 2020 में इस सेगमेंट की हिस्सेदारी 9% थी, जो 2024 में बढ़कर 37% हो गई है। 2025-26 में यह बढ़कर 38-40% तक पहुंचने की उम्मीद है। इस ट्रेंड के पीछे लोगों की बढ़ती आय, शहरीकरण और आलीशान जीवनशैली की ओर रुझान प्रमुख कारण हैं।
मिड और किफायती सेगमेंट में गिरावट
इसके विपरीत, किफायती और मिड-सेगमेंट में लॉन्च की हिस्सेदारी घटकर क्रमशः 10-12% और 19-20% रहने की संभावना है, जो 2020 में 30% और 40% थी। जमीन और कच्चे माल की बढ़ती लागत के चलते इन सेगमेंट में निर्माण अब डेवलपर्स के लिए लाभकारी नहीं रह गया है।
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इन्वेंट्री और कर्ज का स्तर
रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ी हुई आपूर्ति के चलते इन्वेंट्री स्तर धीरे-धीरे ऊपर जा सकता है। QIP (Qualified Institutional Placement) के जरिए इक्विटी निवेश में वृद्धि भी रुझान को समर्थन दे रही है। वित्त वर्ष 2024 में QIP से प्राप्त पूंजी कुल कर्ज का 24% रही, जबकि पहले यह 13-16% के बीच थी। साथ ही ऑपरेटिंग कैश फ्लो में सुधार और मजबूत बैलेंस शीट ने डेवलपर्स के ऋण-से-कैश फ्लो अनुपात को बेहतर बनाया है। अब यह अनुपात 1.1-1.3 गुना रहने की संभावना है, जो पहले 1.2-1.5 गुना था। इस रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि रियल एस्टेट सेक्टर में अब प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट की अहमियत तेजी से बढ़ रही है।




