Close Menu
KhabarwaadKhabarwaad
    Top Posts

    व्हाट्सएप पर जान से मारने की धमकी, पीठाधीश्वर ने मांगी पुलिस सुरक्षा

    April 28, 2026

    राजधानी के प्राचीन रावण भाटा मैदान में रॉयल डिज्नीलैंड मेला का शुभारंभ

    April 19, 2026

    “कागज शून्य, पानी फुल: पिकाडली ‘बियर फैक्ट्री’ में बड़ा खेल”

    April 17, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • व्हाट्सएप पर जान से मारने की धमकी, पीठाधीश्वर ने मांगी पुलिस सुरक्षा
    • राजधानी के प्राचीन रावण भाटा मैदान में रॉयल डिज्नीलैंड मेला का शुभारंभ
    • “कागज शून्य, पानी फुल: पिकाडली ‘बियर फैक्ट्री’ में बड़ा खेल”
    • ‘औद्योगिक आतंकवाद’ का आरोप: जमीन विवाद से तंग किसान हाईटेंशन टावर पर चढ़ा
    • हैवानियत की हद: एयर ब्लोअर से मजदूर के मलद्वार में भरी हवा, हालत नाजुक
    • डांस टीचर मर्डर मिस्ट्री सुलझी: 500 CCTV और 5000 मोबाइल नंबर खंगालने के बाद पुलिस के हाथ लगा नाबालिग आरोपी
    • रीवा के लिए खुशखबरी: अब रायपुर से सीधे मिलेगी फ्लाइट, 17 मार्च से उड़ान शुरू
    • एक धमाका… और सब खत्म: फ्रिज ब्लास्ट से लगी आग में बुजुर्ग महिला की दर्दनाक मौत, परिवारों के लिए चेतावनी बन गया हादसा
    Facebook X (Twitter) Instagram
    KhabarwaadKhabarwaad
    Tuesday, April 28
    • Home
    • छत्तीसगढ़
      • रायपुर संभाग
      • दुर्ग संभाग
      • बिलासपुर संभाग
      • बस्तर संभाग
      • सरगुजा संभाग
    • मध्यप्रदेश
    • राष्ट्रीय समाचार
    • अपराध
    • राजनीति
    • धर्म एवं समाज
    • अफसरशाही
    • खेल
    • मनोरंजन
    • स्वास्थ्य
    • राशिफल
    • Auto & Gadget
    KhabarwaadKhabarwaad
    Home » गढ़फुलझर : जहां पत्थरों में दर्ज है भयना राजवंश का गौरवशाली अतीत

    गढ़फुलझर : जहां पत्थरों में दर्ज है भयना राजवंश का गौरवशाली अतीत

    Shrikant BaghmareBy Shrikant BaghmareNovember 10, 2025 धर्म एवं समाज No Comments3 Mins Read
    गढ़फुलझर... जहां पत्थरों में दर्ज है भयना राजवंश का गौरवशाली अतीत

    गढ़फुलझर… नाम लेते ही आंखों के सामने इतिहास की परतें खुलने लगती हैं। कभी भयना राजवंश का गढ़ रहा यह इलाका आज खंडहरों में तब्दील हो चुका है, लेकिन हर ईंट, हर पत्थर अब भी उस स्वर्णिम युग की गवाही देता है जब यहां राजदरबार की गूंज सुनाई देती थी।

    अधिवक्ता एवं समाजसेवी टिकेंद्र प्रधान बताते है कि गढ़ के भग्नावशेष, रानीसागर तालाब, खंभेश्वरी देवी का प्राचीन मंदिर, मंझला राजा की स्मृतियां और छिन्नमस्ता देवी की पूजा से जुड़ी तांत्रिक परंपराएं सब कुछ रहस्य और रोमांच से भरा है। स्थानीय बैगा और पुजारी आज भी विशेष तंत्र विधियों से देवी की आराधना करते हैं, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का जिंदा प्रमाण है।

    फुलझर जमींदारी का विस्तार बसना, सरायपाली से लेकर पिथोरा तहसील और जोंक नदी तक फैला हुआ था। 1905 से पहले यह संबलपुर जिला के अधीन और बंगाल प्रांत का हिस्सा हुआ करता था। उस दौर में बंगाल प्रांत में उड़ीसा, बिहार, बंगाल और असम तक शामिल थे। बंगाल विभाजन (1905) के बाद फुलझर जमींदारी सेंट्रल प्रॉविंस के अधीन आई, जिसका मुख्यालय नागपुर था।

    1 अप्रैल 1936 को उड़ीसा राज्य गठन के साथ संबलपुर जिला तो ओडिशा में शामिल हुआ, लेकिन फुलझर जमींदारी क्षेत्र- बसना, सरायपाली, पिथोरा, रायपुर जिला का हिस्सा बना रहा। इसीलिए यहां ओड़िया भाषी जनसंख्या अधिक है, पर सांस्कृतिक रूप से यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ से गहराई से जुड़ा है।

    Read Also-   छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रमुख अमित बघेल की तलाश में पुलिस की दबिश, कई राज्यों में दर्ज हैं FIR

    यही कारण है कि फुलझर जमींदारी के लोगों को ओड़िया भाषी कहकर ‘परदेशी’ समझना अज्ञानता है। यह धरती ऐतिहासिक रूप से छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोकसंस्कारों से रची-बसी है। श्री टिकेंद्र प्रधान कहते है कि हम परदेशिया नहीं है। हम पीढ़ियों से जहां थे, वहीं है। हमारा क्षेत्र अलग-अलग प्रांतों के हिस्सा बना।

    आज गढ़फुलझर में स्थित रामचंडी मंदिर नई आस्था का केंद्र बन चुका है। शारदीय और चैत्र नवरात्र में यहां विशाल मेला लगता है, जहां हजारों श्रद्धालु उमड़ते हैं। भक्ति, लोकनृत्य और पारंपरिक अनुष्ठानों से पूरा इलाका जीवंत हो उठता है।
    स्थानीय शिक्षक श्री दुर्गा प्रसाद साहू ने श्री टिकेंद्र प्रधान को बताया कि भयना राजवंश के पतन के बाद उसके वंशज मल्हार (बिलासपुर) चले गए थे। आज भी वे प्रतिवर्ष 26 मई को मंझला राजा के जन्मदिवस पर गढ़फुलझर लौटते हैं और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। साहू जी ने यह भी जानकारी दी कि भयना राजवंश का विस्तृत इतिहास पाटनगढ़ (ओडिशा) कॉलेज की लाइब्रेरी में सुरक्षित है, जिसे इतिहासकार डॉ. शिवतोष दास ने लिखा है।

    किले की दीवारों, मंदिरों और तालाबों को देखकर यह साफ महसूस हुआ यह सिर्फ एक पुराना किला नहीं, बल्कि एक जीवित इतिहास है जो अब भी अपनी कहानी कह रहा है। गढ़फुलझर का हर पत्थर कहता है — हम कभी राजाओं का गढ़ थे।

    • Get News Portal Website @Rs.5999 | WhatsApp on +91 8871571321
    • Get Web Hosting @Rs49 | Visit - HostRT.in
    chhattisgarh hindi news chhattisgarh latest news chhattisgarh news chhattisgarh news headlines chhattisgarh news in hindi chhattisgarh today news
    Share. Facebook Twitter LinkedIn Email Telegram WhatsApp
    Shrikant Baghmare
    • Website

    Keep Reading

    विकास पर नक्सलवादी फन फैलाए बैठे थे, 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद मुक्त होगा देश- अमित शाह 

    राज्य सरकार का बड़ा फैसला: तूहर टोकन ऐप अब चौबीसों घंटे रहेगा चालू, किसानों को मिलेगी बड़ी राहत

    Ekadashi 2026 List: नए साल में कब-कब पड़ेगी एकादशी, देखें पूरी लिस्ट

    दुर्गम गांवों तक पहुंची विकास की रफ्तार: मुख्यमंत्री ने ग्रामीण बस सेवा का किया शुभारंभ

    छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड का कहर: 17 जिलों में शीतलहर अलर्ट, मैनपाट में पारा 4°C से नीचे

    रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित भविष्य गढ़ने में सहायक होगा- मुख्यमंत्री साय

    Add A Comment

    Comments are closed.

    Khabarwaad Vacancy

    Pages

    • Home
    • About Us
    • Privacy Policy
    • Contact Us

    Categories

    • छत्तीसगढ़
    • मध्यप्रदेश
    • राष्ट्रीय समाचार
    • अपराध
    •  
    • खेल
    • राजनीति
    • धर्म एवं समाज
    • मनोरंजन

    Owner / Editor Details :- 

    Name :- Shrikant Baghmare

    Contact :- 6264 390 985

    Email :- khabarwaadnews@gmail.com

     

    © 2026 Maintained By RTISPL
    • Home
    • About Us
    • Privacy Policy
    • Terms of service
    • Contact Us

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.