रायपुर। चुनाव के दिनों में नेता खुद घर-घर दस्तक देते हैं। “भाईसाहब, एक मौका दीजिए, आपके बच्चों का भविष्य बदल देंगे।” लेकिन वही बच्चे जब नौकरी मांगने पहुंच जाएं, तो दरवाज़े पर भविष्य नहीं, प्रोटोकॉल खड़ा मिलता है।
सहायक शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे डीएड अभ्यर्थियों ने प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निवास का घेराव करने की कोशिश की। करीब 30 से 40 अभ्यर्थी अचानक मंत्री आवास पहुंच गए। माहौल ऐसा बना जैसे किसी ने वादों की पुरानी फाइल खोल दी हो।
पिछले एक महीने से अभ्यर्थी सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। उनका कहना है कि जब चुनाव के समय शिक्षा और युवाओं के भविष्य की बातें की गईं, तो अब भर्ती प्रक्रिया शुरू करने में हिचक क्यों? सवाल सीधा है, डिग्री उनके पास है, धैर्य भी था, अब नौकरी कब?
जैसे ही अभ्यर्थी मंत्री निवास पहुंचे, वहां “लोकतंत्र” की जगह “लॉ एंड ऑर्डर” सक्रिय हो गया। पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा। समझाइश दी गई। और एहतियातन नवा रायपुर स्थित मंत्री आवास के बाहर भारी पुलिस तैनात कर दी गई, ताकि कोई और याददाश्त ताजा कराने न आ जाए।
दिलचस्प बात यह है कि यह पहला मौका नहीं था। इससे पहले भी अभ्यर्थी बिना सूचना मंत्री निवास पहुंच चुके हैं। शायद उन्हें अब समझ आ रहा है कि वोट मांगने के लिए सूचना की जरूरत नहीं होती, लेकिन वादा याद दिलाने के लिए अपॉइंटमेंट चाहिए।
यह पूरी घटना एक पुराना राजनीतिक सिद्धांत फिर याद दिलाती है। चुनाव के समय जनता “परिवार” होती है, और चुनाव जीतने के बाद वही जनता “प्रोटोकॉल का विषय” बन जाती है।
अब देखना यह है कि सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू होती है या फिर युवाओं को अगली बार फिर से वही भरोसे का भाषण सुनना पड़ेगा। फिलहाल मंत्री आवास सुरक्षित है, लेकिन बेरोजगार युवाओं का सब्र कब तक सुरक्षित रहेगा। यह बड़ा सवाल है।




