जगदलपुर। 75 दिनों तक चलने वाले प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की सबसे अनूठी रस्म जोगी बिठाई मंगलवार को सिरहासार भवन में संपन्न हुई। बड़े आमाबाल के जोगी परिवार के युवक रघुनाथ नाग ने इस रस्म को अदा कर करीब 617 साल पुरानी परंपरा को जीवित रखा।
रस्म के अनुसार, जोगी निर्जला व्रत रखकर देवी-देवताओं की आराधना करते हैं ताकि दशहरा विधिपूर्वक संपन्न हो सके। इस वर्ष रघुनाथ नाग ने सिरहासार भवन में दंतेश्वरी माई और अन्य देवी-देवताओं का आशीर्वाद लेकर उपवास और तपस्या शुरू की।
केवल पुरुष ही इस रस्म को निभाते हैं। जोगी को मांझी, चालकी और पुजारी की उपस्थिति में नए वस्त्र पहनाए गए और पारंपरिक तलवार की पूजा के बाद वह कुंड में बैठकर संकल्प और उपवास में लीन हो गए। जोगी ने विश्वास जताया कि इस वर्ष बस्तर दशहरा बिना किसी बाधा के संपन्न होगा।
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जानकारी के अनुसार, जोगी की साधना से देवी प्रसन्न होती हैं और दशहरा आयोजन तथा रथ की परिक्रमा में किसी प्रकार की बाधा नहीं आती।
वहीं, जोगी बिठाई रस्म से ठीक एक दिन पहले मारपीट की घटना भी सामने आई। रथ निर्माण के दौरान कुछ कारीगरों ने शराब के नशे में एक युवक को रस्सी से बांधकर पीटा। यह मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है, और घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
आज से फूल रथ की परिक्रमा भी शुरू हो रही है। बेड़ाउमड़ और झाड़उमड़ गांव के ग्रामीणों ने रथ का निर्माण किया है, जबकि किलेपाल इलाके के ग्रामीण इसे खींचेंगे। रथ पर देवी दंतेश्वरी के छत्र को विराजित किया जाएगा और सिरहासार भवन से गोलबाजार चौक होते हुए मां दंतेश्वरी मंदिर तक ले जाया जाएगा।




