नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज़ विराट कोहली ने 12 मई को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेकर सभी को चौंका दिया। कोहली इंग्लैंड के खिलाफ 20 जून से शुरू हो रही पांच मैचों की टेस्ट सीरीज़ का हिस्सा बनने वाले थे, लेकिन उन्होंने इस फॉर्मेट से खुद को अलग कर लिया। कोहली का यह फैसला उनके प्रशंसकों के लिए भावनात्मक रहा, क्योंकि उन्होंने टेस्ट क्रिकेट को हमेशा प्राथमिकता दी थी।
हाल के समय में कोहली का टेस्ट में प्रदर्शन चुनौतीपूर्ण रहा था। 2024 के बाद से खेले गए 11 टेस्ट मैचों में उन्होंने मात्र 440 रन बनाए, जिसमें एक अर्धशतक और एक शतक शामिल है। उनका औसत 23.16 रहा, जो उनके करियर के औसत से काफी नीचे है। हालांकि, फैंस को उम्मीद थी कि वह आगामी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (2025-2027) में अपनी फॉर्म फिर से हासिल करेंगे।
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इस फैसले पर भारत के पूर्व कोच ग्रेग चैपल ने कहा कि कोहली की संन्यास की वजह खेल कौशल में गिरावट नहीं, बल्कि मानसिक स्पष्टता की कमी है। उन्होंने कहा, “कोहली ने महसूस किया कि अब शरीर और मन पहले जैसी तालमेल में नहीं हैं। जब तक मन तेज और स्पष्ट न हो, शरीर भी जवाब देने लगता है।”
चैपल के अनुसार, जब संदेह मन में घर कर जाता है तो यह फैसलों को प्रभावित करता है, फुटवर्क को धीमा करता है और खिलाड़ी की सहजता को खत्म कर देता है।
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कोहली पहले ही टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह चुके हैं, लेकिन वनडे क्रिकेट में वह भारत के लिए खेलना जारी रखेंगे। टेस्ट करियर में कोहली ने 123 मैचों में 9230 रन बनाए, जिसमें 30 शतक और 31 अर्धशतक शामिल हैं। उनका औसत 46.85 रहा।
अब कोहली की जगह भारत को टेस्ट क्रिकेट में एक भरोसेमंद नंबर 4 बल्लेबाज़ की तलाश करनी होगी। करुण नायर, जिन्होंने हाल में इंडिया ए की ओर से दोहरा शतक जड़ा, एक प्रमुख दावेदार हो सकते हैं। वहीं, शुभमन गिल को भी इस क्रम पर आजमाया जा सकता है।




