गरियाबंद। जिले में डीजल घोटाले के चर्चित मामले में आखिरकार प्रशासन ने कार्रवाई की है। सीएमएचओ कार्यालय के लिपिक विजेंद्र कुमार ध्रुव को कलेक्टर भगवान उईके ने 19 मई को निलंबित कर दिया। आरोप है कि उन्होंने सरकारी वाहन सीजी 02 6140 में डीजल डलवाने के नाम पर जय लक्ष्मी पेट्रोल पंप से 25 लाख रुपये के फर्जी बिल पास कराए।
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यह घोटाला पूर्व सीएमएचओ केसी उरांव के कार्यकाल में शुरू हुआ और गार्गी यदु पाल के आने तक चलता रहा। हैरानी की बात यह रही कि गड़बड़ी के पुख्ता प्रमाण होने के बावजूद लिपिक को लंबे समय तक कार्यालय में बनाए रखा गया, जिससे वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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कलेक्टर भगवान उईके के कार्यभार संभालने के बाद दबी हुई फाइलें सामने आ रही हैं और कार्रवाई की गति तेज हुई है। भले ही डीजल पंप बदलकर घोटाले पर रोक लगाई गई हो, लेकिन विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें अभी भी गहरी हैं, जो अन्य मदों में जारी हैं।




