वृंदावन। ठाकुर बांकेबिहारी की नगरी वृंदावन में निर्जला एकादशी के मौके पर श्रद्धालुओं की अचानक बढ़ी संख्या ने शहर की व्यवस्था को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। शनिवार रात से लेकर रविवार सुबह तक परिक्रमा मार्गों और मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इससे पूरे शहर में यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो गई। सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं और श्रद्धालु बीच सड़क पर फंसे नजर आए।
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शनिवार रात आठ बजे से ही श्रद्धालु वृंदावन की सड़कों पर उमड़ने लगे। परिक्रमा मार्ग पूरी तरह भर गया। इसी बीच, संत प्रेमानंद की रात्रिकालीन पदयात्रा भी प्रस्तावित थी, लेकिन अत्यधिक भीड़ को देखते हुए सुरक्षा कारणों से पदयात्रा को स्थगित कर दिया गया।
रात दो बजे संत प्रेमानंद के अनुयायियों ने माइक के जरिए श्रद्धालुओं से अपील की कि वे वापस लौट जाएं, जिससे किसी भी संभावित भगदड़ की स्थिति से बचा जा सके। पदयात्रा स्थगित होने की खबर मिलते ही श्रद्धालु मायूस होकर लौटने लगे।
रविवार सुबह हालात और गंभीर हो गए। विद्यापीठ से लेकर ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। जुगलघाट से लेकर मंदिर के प्रवेश द्वार तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। मंदिर के बाहर और आसपास के क्षेत्रों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची।
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शहर के मुख्य मार्गों पर जाम की स्थिति बनी रही। हर सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें और उनके बीच से गुजरते श्रद्धालु नजर आए। स्थानीय प्रशासन यातायात व्यवस्था बनाए रखने में विफल साबित हुआ।
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए अब पुलिस और प्रशासन पर अतिरिक्त दबाव बन गया है। फिलहाल, किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है, लेकिन व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को त्वरित कदम उठाने की जरूरत है।




