गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व इस वर्ष 10 जुलाई 2025 को पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। यह दिन न केवल गुरुओं को सम्मान देने का होता है, बल्कि इसे ऋषि वेदव्यास जी के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन धार्मिक कर्म, दान-पुण्य, जप-तप और लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है।
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पूर्णिमा तिथि को माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, लेकिन साथ ही कुछ ऐसे कार्य भी हैं जिनसे इस दिन बचना जरूरी होता है, क्योंकि इनसे मां लक्ष्मी की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है।
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मांस और मदिरा से बनाएं दूरी
गुरु पूर्णिमा के दिन मांसाहार और मदिरा सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है। इसके अलावा, लहसुन, प्याज जैसे तामसिक भोजन से भी बचने की सलाह दी जाती है। जो लोग इस दिन सात्विक जीवनशैली का पालन नहीं करते, उनके जीवन में आर्थिक समस्याएं और पारिवारिक कलह बनी रह सकती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से माता लक्ष्मी रुष्ट हो सकती हैं और उनका आशीर्वाद जीवन से दूर हो सकता है।
गुरुओं का करें आदर अपमान से बचें
गुरु पूर्णिमा का सबसे बड़ा संदेश होता है गुरुओं का सम्मान। इस दिन छात्र और श्रद्धालु अपने गुरुजनों को उपहार, पुष्प या वस्त्र आदि भेंट करते हैं और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं। लेकिन अगर कोई व्यक्ति इस दिन गुरु का अपमान करता है या उनसे गलत भाषा में बात करता है, तो यह अत्यंत अशुभ माना जाता है।
धार्मिक शास्त्रों में गुरु को भगवान से भी ऊपर बताया गया है। ऐसे में गुरु पूर्णिमा के दिन अपने जीवन में गुरुओं के महत्व को स्वीकारते हुए, उन्हें सम्मानित करना, प्रार्थना करना और उनकी सीख को जीवन में अपनाना सबसे महत्वपूर्ण कर्मों में से एक है।
इस बार गुरु पूर्णिमा के अवसर पर संयम, श्रद्धा और विनम्रता के साथ इस दिन को मनाएं और जीवन में सद्गुणों की वृद्धि करें।




