तेल अवीव/तेहरान। इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। शनिवार को इजरायली सेना ने दावा किया कि उसने ईरान की न्यूक्लियर फैसिलिटी पर “ऑपरेशन राइजिंग लायन” के तहत बड़ा हवाई हमला किया है। इस हमले में ईरान के 9 प्रमुख परमाणु वैज्ञानिकों के मारे जाने का दावा किया गया है, जो कथित रूप से देश के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े थे। इजरायली सेना के अनुसार, ये हवाई हमले खुफिया निदेशालय द्वारा जुटाई गई सटीक जानकारी के आधार पर किए गए। सेना ने कहा, *”इन वैज्ञानिकों का सफाया ईरान के सामूहिक विनाश के हथियार हासिल करने की कोशिशों पर बड़ा झटका है।”* सेना ने मारे गए वैज्ञानिकों के नाम भी सार्वजनिक किए हैं।
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इजरायल के इस हमले के तुरंत बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। ईरानी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें यरुशलम और तेल अवीव को निशाना बनाया गया। इन हमलों में कम से कम 3 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई घायल बताए जा रहे हैं। ईरान ने कहा कि उसके हमले इजरायल की ओर से बीते दिनों किए गए उन हमलों का प्रतिशोध हैं, जिनमें परमाणु प्रतिष्ठानों और शीर्ष सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाया गया था। ईरान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत ने दावा किया कि अब तक 78 नागरिक मारे गए हैं और 320 से अधिक घायल हुए हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमलों को “रक्षात्मक आवश्यकता” करार देते हुए कहा, “हमारा उद्देश्य है कि ईरान से किसी भी प्रकार के खतरे को पूरी तरह खत्म किया जाए। हम अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।”* नेतन्याहू ने ईरानी जनता से अपने शासकों के खिलाफ खड़े होने की भी अपील की।
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इस बीच, इजरायल की सेना ने नागरिकों से अपील की है कि वे बंकरों और सुरक्षित स्थानों में रहें। देश भर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के चलते पश्चिम एशिया में लंबे समय तक संघर्ष की आशंका गहरा गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष निगरानी जारी है।




