इंफाल। मणिपुर में पिछले साल मई से जारी जातीय हिंसा के बाद हालात अब भी सामान्य नहीं हो पाए हैं। हाईवे ब्लॉकेज और ट्रांसपोर्ट रूट्स के प्रभावित होने से आम लोगों को महंगाई और जरूरी सामानों की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर चुराचांदपुर और राजधानी इंफाल में खाने-पीने की वस्तुएं और दवाइयां अब लगभग गायब हैं या कई गुना महंगी हो गई हैं।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि अब सारी सप्लाई मिजोरम के रास्ते हो रही है, जिससे ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ गई है और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो गई हैं। चुराचांदपुर, जहां कुकी समुदाय का वर्चस्व है, नेशनल हाईवे-2 और 37 पर निर्भर है, जो अब बंद पड़े हैं। इससे ट्रकों को वैकल्पिक लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि मणिपुर में 3 मई 2023 को कुकी और मैतेई समुदाय के बीच संघर्ष शुरू हुआ था। तब से अब तक 300 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, 1500 से ज्यादा लोग घायल हुए और 70,000 से अधिक लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं। पुलिस ने 6,000 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की हैं।
हाल ही में 7 जून की रात हिंसा की एक और लहर देखने को मिली। मैतेई संगठन अरम्बाई टेंगोल के नेता कानन सिंह की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही इंफाल में तनाव फैल गया। प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों में आग लगा दी, सड़कों पर टायर और फर्नीचर जलाए और कई जगह पुलिस से झड़पें हुईं। कुछ ने पेट्रोल डालकर आत्मदाह की भी कोशिश की। फिलहाल, CBI ने कानन सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर 2023 की हिंसा भड़काने का आरोप है।




