नई दिल्ली
दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों में शुमार माइक्रोसॉफ्ट एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है। कंपनी ने अपने ग्लोबल वर्कफोर्स में से लगभग 4 फीसदी कर्मचारियों की छंटनी का फैसला लिया है। इस फैसले से करीब 9000 से अधिक कर्मचारियों की नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है। हालांकि, कंपनी ने इस बड़े निर्णय के पीछे के कारणों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
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यह छंटनी वर्ष 2023 के बाद माइक्रोसॉफ्ट की सबसे बड़ीबड़ी छंटनी मानी जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2 जुलाई को इस छंटनी की पुष्टि हुई, जो संगठनात्मक बदलाव का हिस्सा बताई जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि किस विभाग या सेक्शन पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित टूल्स, खासकर कोडिंग असिस्टेंट्स के बढ़ते उपयोग का सीधा असर संबंधित विभागों के कर्मचारियों पर पड़ सकता है।
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माइक्रोसॉफ्ट ने हाल के वर्षों में अपने कार्यप्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को तेजी से शामिल किया है। कंपनी के सीईओ सत्य नडेला ने इस वर्ष की शुरुआत में कहा था कि माइक्रोसॉफ्ट के लगभग 20 से 30 प्रतिशत कोड अब एआई द्वारा तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही कुछ विभागों में एआई का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है और इसे सीधे तौर पर कर्मचारियों की परफॉर्मेंस रिव्यू से जोड़ा गया है।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि एआई के बढ़ते उपयोग से जहां कार्यकुशलता और उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी हो रही है, वहीं इसका सीधा असर कर्मचारियों की जरूरत पर भी पड़ रहा है। माइक्रोसॉफ्ट का यह कदम वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में हो रहे बदलावों का प्रतीक है, जिसमें ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस धीरे-धीरे मानवीय श्रम की जगह ले रहे हैं।
हालांकि, इस छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों को कंपनी की ओर से पुनर्स्थापन और अन्य विकल्पों की सुविधा दी जा सकती है, लेकिन यह घटना तकनीकी क्षेत्र में काम कर रहे लाखों पेशेवरों के लिए एक गंभीर संकेत है।




