नई दिल्ली। देश में करीब 17 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर राष्ट्रीय जनगणना होने जा रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह जनगणना प्रक्रिया 1 मार्च 2027 से पूरे देश में शुरू होगी। इस बार जनगणना के साथ-साथ जाति आधारित जनगणना भी की जाएगी, जो सामाजिक और आर्थिक योजनाओं की दिशा तय करने में सहायक मानी जा रही है।
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राष्ट्रीय जनगणना दो चरणों में संपन्न की जाएगी। पहले चरण की शुरुआत उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों से होगी। लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में जनगणना की प्रक्रिया 1 अक्टूबर 2026 से ही शुरू कर दी जाएगी। इन क्षेत्रों में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जल्दी शुरुआत की जा रही है, ताकि भारी बर्फबारी और अन्य प्राकृतिक बाधाओं से पहले जनगणना पूरी की जा सके।
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जनगणना को लेकर केंद्र सरकार की तैयारियां जोरों पर हैं। डिजिटल तकनीक का उपयोग कर इसे अधिक पारदर्शी, सटीक और तेज बनाने की योजना है। नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे।
गौरतलब है कि पिछली जनगणना 2011 में हुई थी और 2021 में होने वाली जनगणना COVID-19 महामारी के कारण टाल दी गई थी। अब लगभग 17 वर्षों के बाद होने जा रही इस जनगणना को देश की जनसंख्या, सामाजिक संरचना और जातिगत समीकरणों की अद्यतन तस्वीर के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जातिगत आंकड़े सरकार को समाज के विभिन्न वर्गों तक योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने में मदद करेंगे। यह जनगणना न केवल आंकड़ों का संग्रह होगी, बल्कि आने वाले वर्षों की सामाजिक-आर्थिक दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हो सकती है।




