नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रविवार को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत राज्यसभा के लिए चार प्रतिष्ठित व्यक्तियों को मनोनीत किया है। यह चारों अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए जाने जाते हैं। मनोनीत सदस्यों में पूर्व राजनयिक हर्ष श्रृंगला, वरिष्ठ वकील उज्ज्वल निकम, इतिहासकार डॉ. मीनाक्षी जैन और समाजसेवी सदानंदन मास्टर शामिल हैं।
पूर्व विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला
हर्षवर्धन श्रृंगला भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं। वे भारत के विदेश सचिव और अमेरिका में भारत के राजदूत के पद पर कार्य कर चुके हैं। उन्हें कूटनीति, रणनीतिक मामलों और वैश्विक संबंधों का गहरा अनुभव है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारत की विदेश नीति को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई है। उनकी नियुक्ति को विदेश मामलों में विशेषज्ञता लाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
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विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम
देश के प्रमुख अभियोजकों में शुमार उज्ज्वल निकम ने कई हाई-प्रोफाइल आपराधिक और आतंकवाद से जुड़े मामलों में सरकार की ओर से प्रभावशाली पैरवी की है। 1993 मुंबई बम धमाकों और 26/11 मुंबई आतंकी हमले जैसे मामलों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेष रूप से अजमल कसाब के मुकदमे में उनकी कानूनी दक्षता और जनसंवेदनशील रणनीति की व्यापक सराहना हुई। निकम ने टाडा अदालत में 14 वर्षों तक सेवाएं दी हैं और आतंकवाद के खिलाफ भारत की कानूनी लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाई है।
इतिहासकार डॉ. मीनाक्षी जैन
डॉ. मीनाक्षी जैन भारतीय इतिहास लेखन के क्षेत्र की एक सम्मानित विद्वान हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज में इतिहास पढ़ाया है और कई शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ी रही हैं। उनकी पुस्तकों में ‘राम और अयोध्या’, ‘सती’, ‘देवताओं की उड़ान’ जैसी शोधपरक कृतियां शामिल हैं, जो भारत के सांस्कृतिक और धार्मिक इतिहास पर गहराई से प्रकाश डालती हैं। वर्ष 2020 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
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समाजसेवी सदानंदन मास्टर
सदानंदन मास्टर केरल से आने वाले एक समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने अनुसूचित जाति, जनजाति और वंचित वर्गों के बीच शिक्षा और सामाजिक जागरूकता फैलाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। दशकों से वे जमीनी स्तर पर कार्यरत हैं और उनकी छवि एक निःस्वार्थ, प्रतिबद्ध और प्रभावशाली सामाजिक कार्यकर्ता की है।




