भोपाल
मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में मंगलवार दोपहर एक युग का अंत हो गया, जब एशिया की सबसे उम्रदराज मानी जाने वाली हथिनी वत्सला ने अंतिम सांस ली। वत्सला की उम्र 100 वर्ष से अधिक बताई गई है और वह लंबे समय से पन्ना के जंगलों की पहचान रही थी। उसका निधन हिनौता रेंज स्थित हाथी कैंप में हुआ।
राजधानी रायपुर में राष्ट्रीय स्तर की ‘लखपति महिला पहल’ क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन 9 से 11 जुलाई तक
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में वत्सला के आगे के पैरों के नाखूनों में चोट लग गई थी, जिसके चलते उसे चलने में परेशानी हो रही थी। मंगलवार सुबह वह खैरैयां नाले के पास बैठ गई और तमाम प्रयासों के बावजूद उठ नहीं सकी। दोपहर करीब 1:30 बजे उसने अपने प्राण त्याग दिए।
वत्सला को वर्ष 1971 में केरल के नीलांबुर जंगल से मध्य प्रदेश लाया गया था। पहले उसे नर्मदापुरम में रखा गया था और बाद में पन्ना टाइगर रिजर्व में शिफ्ट कर दिया गया। यहीं पर उसने अपना शेष जीवन बिताया और जंगल की एक अभिन्न साथी बन गई।
उसकी दिनचर्या में शामिल था खैरैयां नाले पर स्नान करना और दलिया जैसे नरम खाद्य पदार्थों का सेवन करना। बढ़ती उम्र के कारण वह अब ठीक से देख नहीं पाती थी और ज्यादा दूरी भी तय नहीं कर सकती थी। बावजूद इसके, वह वन विभाग और पर्यटकों के बीच विशेष स्थान रखती थी।
वत्सला का जाना केवल एक हथिनी का निधन नहीं है, बल्कि पन्ना के जंगलों की एक जीवंत विरासत का अंत है। उसका जीवन, सेवा और जंगलों से नाता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।




