नई दिल्ली। भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में मानसून की सक्रियता से बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिससे मणिपुर, मिजोरम, असम, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और मुंबई में जनजीवन प्रभावित हुआ है। मणिपुर में तेज़ बारिश के कारण आई बाढ़ से 1.64 लाख लोग प्रभावित हुए हैं और 35,000 से अधिक घरों को नुकसान पहुंचा है। करीब 4,000 लोगों का रेस्क्यू किया गया है, जबकि 100 से अधिक भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। नगालैंड को मणिपुर से जोड़ने वाला NH-2 का 50 मीटर हिस्सा धंस गया है, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है। मिजोरम में 24 मई से जारी भारी बारिश के कारण 13 जून तक पर्यटकों के लिए यात्रा पर प्रतिबंध लगाया गया है। 11 दिनों में 626 भूस्खलन की घटनाएं हुईं, जिनमें 5 लोगों की मौत हो गई है।
असम में बाढ़ और भूस्खलन से 6 और लोगों की मौत हो गई है, जिससे मरने वालों की संख्या 17 तक पहुंच गई है। राज्य के 21 जिलों के 6.5 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। 7 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिनमें हैलाकांडी की कटाखाल नदी का जलस्तर सबसे अधिक है। मुंबई में बुधवार सुबह हल्की बारिश हुई है, और मौसम विभाग ने अगले दिन के लिए गरज के साथ बिजली चमकने, बारिश और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है।
मंत्री विजय शाह की बढ़ सकती हैं मुश्किलें: नोटिस भेजकर पूछताछ करेगी SIT, कर्नल सोफिया पर की थी विवादित टिप्पणी
मध्य प्रदेश और बिहार में भी आंधी-बारिश का दौर जारी है। दोनों राज्यों में 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने का अलर्ट है। मध्य प्रदेश के 17 और बिहार के 29 जिलों में बारिश होने की संभावना है। राजस्थान के 29 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है, जिसमें जयपुर, कोटा, अजमेर, भरतपुर और उदयपुर शामिल हैं। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में तेज हवाओं और ओलावृष्टि की संभावना जताई है। इन घटनाओं से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं, और संबंधित राज्य सरकारें प्रभावित लोगों की सहायता के लिए प्रयासरत हैं




