लंदन/किंगदाओ: भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को चीन के किंगदाओ में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान अपने चीनी समकक्ष एडमिरल डोंग जून से अहम द्विपक्षीय मुलाकात की। इस बातचीत के दौरान उन्होंने भारत-चीन संबंधों में स्थिरता और भरोसे की बहाली के लिए चार सूत्रीय फॉर्मूला पेश किया, ताकि सीमा पर तनाव की स्थिति को रोका जा सके और गलवान जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
राजनाथ सिंह ने चार प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया:
- डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया का पालन – भारत ने चीन से 2024 की सहमति के अनुसार डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया को पूरी तरह लागू करने की मांग की।
- सीमा पर तनाव में कमी – उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए तनाव कम करने के ठोस प्रयास जरूरी हैं।
- सीमांकन एवं परिसीमन में प्रगति – दोनों देशों को सीमांकन और सीमा निर्धारण की प्रक्रिया को तेज करने की आवश्यकता है ताकि पुराने विवाद सुलझाए जा सकें।
- विशेष प्रतिनिधि तंत्र का सक्रिय उपयोग – भारत ने विशेष प्रतिनिधियों के स्तर पर बातचीत को और प्रभावी बनाने की बात कही ताकि जटिल मुद्दों पर समाधान निकाला जा सके
क्या है 2024 का डिसएंगेजमेंट प्लान?
2024 में भारत और चीन के बीच एक समझौता हुआ था जिसके तहत वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर पेट्रोलिंग को लेकर स्पष्ट व्यवस्था तय की गई थी। यह व्यवस्था गलवान जैसी टकरावपूर्ण स्थितियों से बचने के लिए की गई थी। अक्टूबर 2024 में दोनों देशों ने पेट्रोलिंग के नियमों को स्पष्ट करते हुए साझा समझौता किया था।
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यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और चीन के बीच 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद से सीमा पर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। दोनों देशों के बीच कई दौर की सैन्य और राजनयिक वार्ताएं हो चुकी हैं लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हो सका है।
राजनाथ सिंह की यह पहल दोनों देशों के रिश्तों को पटरी पर लाने की एक कोशिश मानी जा रही है। भारत स्पष्ट कर चुका है कि सीमा पर शांति और स्थिरता, द्विपक्षीय संबंधों के सामान्य होने की पहली शर्त है।




