सनातन धर्म में आषाढ़ पूर्णिमा का दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना के लिए विशेष रूप से शुभ होती है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किए गए जप, तप, व्रत, दान और पूजा से सौगुना फल प्राप्त होता है। यह तिथि गुरु पूर्णिमा के रूप में भी प्रसिद्ध है, जब लोग अपने गुरुजनों को स्मरण कर उनके प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करते हैं।
वर्ष 2025 में आषाढ़ पूर्णिमा का पर्व 10 जुलाई को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 10 जुलाई को रात 1 बजकर 36 मिनट से शुरू होकर 11 जुलाई को रात 2 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। चूंकि 10 जुलाई को सूर्योदय के समय यह तिथि प्रभावी रहेगी, इसलिए इसी दिन पर्व मनाया जाएगा।
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इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना, दान देना और ब्राह्मणों को भोजन कराना अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है। साथ ही मां लक्ष्मी को कमल पुष्प और भगवान विष्णु को तुलसी पत्र अर्पित करने से सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
गुरु पूर्णिमा के रूप में यह दिन ज्ञान, शांति और सद्गुणों को आत्मसात करने का प्रतीक है। लोग अपने गुरुओं के चरणों में उपस्थित होकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लेते हैं। आषाढ़ पूर्णिमा आत्मिक शुद्धि, संस्कारों की स्मृति और समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाने का प्रेरणादायक पर्व है।




