नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए नए टैरिफ को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हाल ही में ट्रंप ने भारत से आयातित कई वस्तुओं पर 50 फीसदी तक का अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला लिया, जिसके बाद कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इस पर कड़ा विरोध जताया है।
थरूर ने अमेरिकी प्रशासन के इस कदम को दोहरा मापदंड करार दिया है। उन्होंने कहा कि, अमेरिका ने भारत के खिलाफ टैरिफ इसलिए बढ़ाए हैं क्योंकि भारत रूस से तेल खरीद रहा है, जबकि चीन इससे कहीं अधिक मात्रा में तेल आयात कर रहा है लेकिन उसे ‘90 दिनों की छूट’ दी गई है। उन्होंने कहा, चीन भारत से कई गुना ज्यादा रूसी तेल और अन्य सामग्रियां आयात कर रहा है, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, अमेरिका खुद भी रूस से यूरेनियम और पैलेडियम जैसी वस्तुएं ले रहा है। यह अमेरिका का दोहरा रवैया है।
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यह कैसी दोस्ती?
थरूर ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि ट्रंप की सरकार भारत के साथ दोस्ताना व्यवहार करेगी, लेकिन मौजूदा रवैया दोस्ती नहीं बल्कि दबाव की राजनीति है। उन्होंने कहा, मैंने सोचा था कि ट्रंप के होते हुए अमेरिका हमारे साथ दोस्ती निभाएगा, लेकिन यह तो किसी भी तरीके से अच्छा व्यवहार नहीं है।
पारस्परिक टैरिफ का दबाव
कांग्रेस नेता ने आशंका जताई कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के जवाब में भारत के भीतर भी अब अमेरिकी उत्पादों पर पारस्परिक टैरिफ लगाने का दबाव बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि इस फैसले से दोनों देशों के मैत्रीपूर्ण संबंधों पर असर पड़ेगा। थरूर ने सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि भारत को इससे सबक लेकर अपनी व्यापारिक रणनीति में बदलाव करना चाहिए।
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दूसरे बाजारों पर ध्यान देने की सलाह
थरूर ने कहा कि अब समय आ गया है जब भारत को अपने व्यापारिक रिश्ते अन्य देशों के साथ मज़बूत करने चाहिए। उन्होंने कहा, अब हमें अन्य बाजारों में गंभीरता से विविधता लाने की जरूरत है, जो हमारे उत्पादों में रुचि रखते हों। ब्रिटेन के साथ हमारा एक मुक्त व्यापार समझौता है। हम यूरोपीय संघ से भी बात कर रहे हैं। ऐसे कई देश हैं जिनके साथ हम उम्मीद करते हैं कि हम ऐसा कर पाएंगे।




