नई दिल्ली। ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन के प्रमुख और पंजाब के खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह को राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने अमृतपाल को सलाह दी कि वे अपनी याचिका पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में दायर करें। साथ ही हाईकोर्ट को निर्देश दिया गया कि वह इस मामले की सुनवाई पूरी कर छह हफ्तों के भीतर फैसला सुनाए।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस स्तर पर दखल नहीं देगा और उचित होगा कि अमृतपाल पहले हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएं।
अमृतपाल सिंह के वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने कोर्ट में दलील दी कि उनके मुवक्किल को ढाई साल से NSA के तहत हिरासत में रखा गया है, जबकि जिस एफआईआर के आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था, उसमें चार्जशीट पहले ही दाखिल हो चुकी है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले से ही लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंग्मो द्वारा दायर एक समान याचिका पर सुनवाई कर रहा है, इसलिए इस मामले को भी उसी के साथ सुना जाना चाहिए।
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इस पर जस्टिस अरविंद कुमार ने स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक का मामला अलग है, क्योंकि उन्हें दूसरे राज्य की जेल में रखा गया है। कोर्ट ने शुरू में सुझाव दिया था कि याचिका पर सुनवाई जनवरी या फरवरी 2026 में हो सकती है, लेकिन याचिकाकर्ता की आपत्ति के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामला हाईकोर्ट को भेज दिया और छह हफ्तों में निर्णय देने का अनुरोध किया।
सुनवाई के दौरान शुरुआत में केंद्र सरकार की ओर से कोई वकील मौजूद नहीं था। बाद में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू कोर्ट पहुंचे, जिन्हें बताया गया कि मामला अब हाईकोर्ट को भेजा गया है। राजू ने कहा कि छह हफ्तों का समय पर्याप्त नहीं होगा क्योंकि सरकार को जवाब दाखिल करने और आवश्यक दस्तावेज तैयार करने में समय लगेगा। इस पर जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही हाईकोर्ट पर पर्याप्त दबाव डाल चुका है और अब वही इस पर अंतिम निर्णय लेगा।
गौरतलब है कि ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह और उनके नौ सहयोगी फिलहाल असम के डिब्रूगढ़ जेल में NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत बंद हैं।




