दुर्ग। स्वामी आत्मानंद स्कूल की प्रिंसिपल संगीता नायर पर धार्मिक भावनाएं आहत करने के गंभीर आरोप लगे हैं। कई छात्रों का कहना है कि परीक्षा के दौरान प्रिंसिपल ने उनकी शिखा (चोटी) खींचते हुए कहा कि इसे काटकर ही स्कूल आना होगा। यही नहीं, उन्होंने तिलक और कलावा पर भी आपत्ति जताते हुए छात्रों को स्कूल से निकालने की धमकी दी।
छात्रों के आरोप
पीड़ित छात्रों का कहना है कि धार्मिक प्रतीकों के कारण उन्हें प्रताड़ित किया गया। यहां तक कि चेतावनी दी गई कि यदि वे तिलक, शिखा और मौली पहनकर आए तो ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) देकर स्कूल से बाहर कर दिया जाएगा और परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा। छात्रों का आरोप है कि जिन बच्चों ने परंपरागत रूप से शिखा रखी थी, उन्हें विशेष रूप से टारगेट किया गया। उनके परीक्षा पत्रों पर गोला बनाकर हस्ताक्षर कर दिए गए और आगे परीक्षा देने से रोक दिया गया। एक छात्र ने बताया, मैं ब्राह्मण हूं, इसलिए शिखा रखता हूं, लेकिन प्रिंसिपल मैडम ने जबरदस्ती बाल कटवाने और मौली उतारने का दबाव डाला।
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हिंदू संगठन का विरोध
बजरंग दल दुर्ग के संयोजक सौरभ देवांगन ने आरोप लगाया कि प्रिंसिपल लंबे समय से हिंदू प्रतीकों को लेकर छात्रों को प्रताड़ित कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में 68 छात्रों में से 40 को फेल कर दिया गया, जिनमें अधिकतर वही थे जो धार्मिक परंपराएं निभाते थे। देवांगन ने चेतावनी दी कि यदि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने तत्काल कार्रवाई नहीं की तो डीईओ कार्यालय का घेराव कर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
स्कूल प्रबंधन की सफाई
इस पूरे मामले पर प्रिंसिपल संगीता नायर से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। वहीं, स्कूल के व्याख्याता आर.के. दुबे ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बच्चों से केवल अनुशासन और एकरूपता बनाए रखने के लिए बाल छोटे रखने को कहा गया था। इसमें किसी प्रकार का धार्मिक भेदभाव नहीं है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने पुष्टि की कि शिकायत प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।




