राजनांदगांव। शहर के व्यस्त बाजार क्षेत्र में डेढ़ वर्षीय मासूम बालिका के अपने पिता से बिछड़ने की घटना ने एक तरफ आम नागरिकों की संवेदनशीलता को सामने ला दिया, तो दूसरी ओर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। जहां राह चलते युवकों ने रोती हुई बच्ची को देखकर जिम्मेदारी निभाई, वहीं पुलिस पर मामले को गंभीरता से न लेने के आरोप लगे।
मामला सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक Ankita Sharma ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए कड़ी कार्रवाई की है। महिला थाना प्रभारी Geetanjali Singh और कोतवाली थाने के आरक्षक Chandresh Sinha को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर लाइन अटैच कर दिया गया है। वहीं कोतवाली थाना प्रभारी Nandkishor Gautam का भी तबादला कर दिया गया है।
नशे में पिता, सड़क पर रोती मासूम
जानकारी के अनुसार शहर के मार्केट इलाके में एक व्यक्ति अपनी डेढ़ वर्षीय बच्ची के साथ आया हुआ था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वह नशे की हालत में था। नशे के कारण वह बच्ची पर ध्यान नहीं दे पाया और इसी दौरान मासूम उससे बिछड़ गई।
कुछ देर बाद बच्ची सड़क किनारे खड़ी होकर जोर-जोर से रोती हुई दिखाई दी। बाजार में मौजूद लोगों की नजर जब उस पर पड़ी तो स्थिति समझ में आई कि बच्ची अपने परिजनों से बिछड़ गई है।
दो युवकों ने दिखाई मानवता
इसी दौरान वहां से गुजर रहे दो युवकों की नजर रोती हुई बच्ची पर पड़ी। बच्ची को लावारिस हालत में देखकर दोनों ने तुरंत उसे अपने संरक्षण में लिया और सोचा कि उसे पुलिस के पास ले जाकर उसके परिजनों तक पहुंचाया जाए।
मानवता और जिम्मेदारी का परिचय देते हुए दोनों युवक बच्ची को सीधे महिला थाना लेकर पहुंचे, ताकि पुलिस की मदद से उसकी पहचान कराई जा सके।
थाने में मिली बेरुखी
लेकिन यहां से कहानी ने एक अलग मोड़ ले लिया। आरोप है कि महिला थाना पहुंचने पर पुलिस की ओर से अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई।
बताया जा रहा है कि महिला थाना प्रभारी ने तत्काल कार्रवाई करने के बजाय युवकों से कहा कि वे डायल 112 या चाइल्ड हेल्पलाइन पर संपर्क करें।
इसके बाद दोनों युवक बच्ची को लेकर कोतवाली थाना पहुंचे, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद आरक्षक ने भी मामले में विशेष रुचि नहीं दिखाई और कोई ठोस पहल नहीं की।
फिर भी हार नहीं मानी
पुलिस थानों से निराश होने के बाद भी दोनों युवकों ने हार नहीं मानी। वे बच्ची को लेकर चीखली पुलिस चौकी पहुंचे, जहां एक आरक्षक की मदद से चाइल्ड हेल्पलाइन से संपर्क किया गया।
चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम ने तत्परता दिखाते हुए बच्ची को संपर्क गृह भेजा और बाद में जानकारी जुटाकर उसे उसके परिजनों से मिलवा दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम में यह साफ दिखा कि जहां आम नागरिकों ने संवेदनशीलता और जिम्मेदारी दिखाई, वहीं शुरुआती स्तर पर पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई।
एसपी ने दिखाई सख्ती
मामले की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक Ankita Sharma ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए तत्काल कार्रवाई की।
महिला थाना प्रभारी Geetanjali Singh और आरक्षक Chandresh Sinha को निलंबित कर दिया गया है। आदेश में दोनों को बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ने और नियमित उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही कोतवाली थाना प्रभारी Nandkishor Gautam का भी तबादला कर दिया गया है।
एक घटना, कई सवाल
यह घटना सिर्फ एक बच्ची के बिछड़ने की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताती है कि कई बार संकट की घड़ी में जनता पहले जिम्मेदारी निभाती है और सिस्टम बाद में जागता है।
यदि उन युवकों ने समय रहते बच्ची को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की पहल न की होती, तो स्थिति और गंभीर भी हो सकती थी।
ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब कोई नागरिक किसी संकटग्रस्त बच्चे को लेकर पुलिस के पास पहुंचता है, तो क्या उसे तुरंत मदद मिलनी चाहिए या फिर उसे अलग-अलग नंबरों और प्रक्रियाओं के हवाले कर दिया जाना चाहिए।
इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि समाज में मानवता आज भी जिंदा है, लेकिन व्यवस्था को उतनी ही संवेदनशील और जवाबदेह बनने की जरूरत है।




